
इलाहाबाद । शहर के जाने-माने चर्चित प्रेस छायाकार राजीव बोस का 54 वर्ष की उम्र में आज निधन हो गया। मधुमेह सहित कई बीमारियों से ग्रसित राजीव के संघर्षपूर्ण जीवन का आज दुःखदअवसान हो गया। दारागंज निवासी राजीव का दारागंज घाट पर अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें प्रेस जगत के शोकाकुल पत्रकार, प्रेस छायाकार सहित उनके तमाम चाहने वाले शरीक हुए।
उस समय नये दौर के प्रेस छायाकारों में 1984 में राजीव ने करिअर शुरू किया 1986 में दैनिक जागरण से जुड़कर प्रेस फोटोग्राफी को अपना करियर बनाया
दादा जनमोर्चा, अमृत प्रभात सहित तमाम अखबारों से सम्बद्ध रहे,लेकिन सबसे लंबी पारी उनकी दैनिक ‘आज’ की रही,जिसके साथ वह अंत तक जुड़े रहे।
दादा ने अपनी कड़ी मेहनत और लगन के कारण प्रेस जगत में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। क्राइम से जुड़ी फोटोग्राफी में उनका कोई जोड़ नहीं था। एक दौर ऐसा था जब जनमोर्चा अखबार में रिपोर्टर श्री शचीन्द्र श्रीवास्तव की क्राइम रिपोर्टिंग और राजीव बोस की क्राइम सीन की तस्वीरों ने शहर में तहलका मचा दिया था। पुलिस और प्रशासन तक के लोग दादा की फोटोग्राफी की दाद देते थे।
दादा की बेबाकी और गैर समझौतावादी प्रवृत्ति के कारण उनके आलोचकों की भी कमी नहीं थी। हालाँकि वो अपनी तस्वीरों से सबको वाजिब जवाब दे देते थे।
दादा जीवन भर समर्पित भाव से प्रेस फोटोग्राफी के लिए दौड़ते भागते रहे और अभाव के जीवन में ही उनकी इहलीला भी समाप्त हो गई।
लेकिन दादा कभी थके या रुके नहीं। दादा फोटोग्राफिक सोसायटी आफ इलाहाबाद के सक्रिय सदस्य रहे। उनकी तमाम तस्वीरें पुरस्कृत हुईं। वह इलाहाबाद प्रेस फोटोग्राफर्स एसोसिएशन के कई वर्षों तक अध्यक्ष भी रहे। इस क्रम में उन्हें सबसे ज्यादा पहचान उनके द्वारा सिविल लाइन्स चौराहे पर विश्व फोटोग्राफी दिवस के अवसर पर आयोजित की जाने वाली छायाचित्र प्रदर्शनी से मिली। बाद में उन्होंने इस प्रदर्शनी को शहर के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित प्रेस छायाकार स्वर्गीय एनएन मुखर्जी की स्मृति में आयोजित किया, और शहर की नई पीढ़ी को एनएन मुखर्जी के कुंभ की ऐतिहासिक दुर्घटना की तस्वीरों से साक्षात्कार कराया।
राजीव का जाना बहुत ही दुखद है भगवान् उनकी आत्मा को शांति दे उनके साथ गुजरे पल हमेशा याद आते रहेंगे।