
प्रयागराज। होली के धार्मिक महत्व की जानकारी देते हुए सुप्रसिद्ध तन्त्र जगत के आजत शत्रु साधक शिरोमणि माँ बंगलामुखी उपासक महंत बजरंग मुनि उदासीन ने बताया कि होली लौकिक व्यवहार में प्रमुख भारतीय त्योहार होने के साथ साधना की दृष्टि से भी विशेष तंत्रोक्त-मंत्रोक्त सिद्धमय महापर्व है।
यदि होली को पूर्व दिशा की ओर हवा चले तो राजा एवं प्रजा सुखी अर्थात पूरे राज्य में सुख शांति होगी। दक्षिण की ओर हवा चले तो राज्य की सत्ता भंग और शासन पक्ष को परेशानी, पश्चिम दिशा की ओर हवा चले तो तृण एवं सम्पत्ति बढ़ेगी और उत्तर की ओर हवा चले तो धान्य की वृद्धि होगी। यदि होली का धुआं आकाश की ओर सीधा जाए तो राजा का गढ़ टूटेगा और राज्य के बड़े नेताओं की कुर्सी जाएगी। ऐसा माना जाता है।
महंत जी ने बताया कि भारत भर में होली और रंगपंचमी उमंग और उत्सव का त्योहार माना जाता है। वहीं आध्यात्मिक दृष्टि से भी इस पर्व का बहुत महत्व है। होली की रात्रि सिद्धिदायक रात्रि मानी जाती है, इस रात्रि में तंत्र-मंत्र एवं साधनाओं का विशेष रूप से रुझान होता है क्योंकि इस रात्रि में सम्पन्न की गई छोटी से छोटी साधना एवं प्रयोग भी जीवन को बदल देने में समक्ष हैं। यह पर्व नई सिद्धियां हासिल करने का उत्तम अवसर है एवं पुरानी सिद्धियों को शक्ति सम्पन्न बनाने का भी।