गुप्त नवरात्रि का पर्व देवी भक्तों के लिए खास, इस समय की जाती हैं तांत्रिक साधानाएं

माँ बंगलामुखी उपासक महंत बजरंगमुनि उदासीन ने बताया कि गुप्त नवरात्रि का पर्व देवी भक्तों के लिए खास रहता है। गुप्त नवरात्र के दिनों में तांत्रिक साधनाएं की जाती हैं। इस नवरात्रि में खास साधक ही साधना करते हैं। मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि में की जाने वाली साधना को गुप्त रखा जाता है। इस साधना से देवी जल्दी प्रसन्न होती है।
माँ बंगलामुखी उपासक ने बताया कि गुप्त नवरात्रि में नौ देवियों के साथ दस महाविद्याओं की जाती है


पूजा नवरात्रि के पहले दिन शैल पुत्री, दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन चंद्रघंटा, चौथे दिन कूष्माण्डा, पांचवें दिन स्कंदमाता, छठे दिन कात्यायनी, सातवें दिन कालरात्रि, आठवें दिन महागौरी, नौवें दिन सिद्धिदात्री माता की पूजा की जाती है। इन नौ देवियों के साथ ही दस महाविद्याओं की भी विशेष पूजा की जाती है। ये हैं दस महाविद्या काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला।।
3 जुलाई से आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि शुरू हो रही है। एक हिन्दी वर्ष में चार बार नवरात्रि आती है। तंत्र साधना के दृष्टिकोण से दो नवरात्रि सामान्य होती हैं और दो गुप्त होती हैं। चैत्र और आश्विन मास में आने वाली नवरात्रि से ज्यादा महत्व गुप्त नवरात्रि का माना जाता है। माघ मास और आषाढ़ मास में गुप्त नवरात्रि आती है। इस दिनों में गुप्त रूप से देवी की साधना की जाती है। बुधवार, 3 जुलाई से बुधवार, 10 जुलाई तक गुप्त नवरात्रि रहेगी।

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