लखनऊ उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने महंगाई के दौर में प्रदेश के निवासियों पर बिजली गिरा दी है। सरकार ने शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्र के साथ ही कॉमर्शियल बिजली की दरों में इजाफा कर दिया है।
प्रदेश सरकार ने बिजली की नई दरों का आदेश जारी किया है। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने आदेश किया है। घरेलू सहित ज्यादातर श्रेणी के उपभोक्ताओं की बिजली महंगी हो गई है।बिजली औसतन 11.69 फीसद मंहगी होगी । घरेलू बिजली की दरों में 8 से 12 फीसदी इजाफा। राज्य विद्युत नियामक आयोग ने नई दरों पर मंथन के बाद अंतिम फैसला लिया है। बिजली के नए टैरिफ में घरेलू, ग्रामीण, व्यावसायिक और इंडस्ट्री सभी तरह के उपभोक्ताओं की दरों में बढ़ोतरी की गई है। नई दरों से सबसे ज्यादा प्रभावित घरेलू उपभोक्ता हो रहे हैं। इससे पहले बिजली कंपनियों के प्रस्ताव में शहरी घरेलू उपभोक्ताओं की 0-150 यूनिट की स्लैब की बिजली दर 6.20 रुपए प्रति यूनिट करने का प्रस्ताव दिया गया था। इसके अलावा, शहरी घरेलू उपभोक्ताओं जिनकी खपत 500 यूनिट से ज्यादा है उनकी बिजली 1 रुपए प्रति यूनिट बढ़ाने का प्रस्ताव दिया गया था।
-घरेलू श्रेणी की बिजली 12% बढ़ी।
-किसानों के लिए बिजली 9% महंगी।
-शहरी क्षेत्र के किसानों के लिए 15% महंगी।
-औद्योगिक श्रेणी बिजली की कीमत 10% बढ़ी।
-कुल टैरिफ में 11.69% की वृद्धि।
फिलहाल 500 यूनिट के लिए बिजली उपभोक्ताओं को 6.50 रुपए प्रति यूनिट देना पड़ता है, अब उपभोक्ताओं को बढ़ी दरों पर भुगतान करना होगा। आदेश के अनुसार शहरी क्षेत्र में जहां 15 फीसदी की बढ़ोत्तरी की है, वहीं औद्योगिक क्षेत्र में यह इजाफा 10 फीसदी का किया गया है। इसके अलावा सरकार ने ग्रामीण इलाकों में फिक्स चार्ज 400 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपए कर दिया है। प्रदेश में आम लोगों-किसानों के विरोध के बाद भी बिजली की दरों में 10स से 15 प्रतिशत बढ़ोतरी की गई है।
यूपी में बिजली की दरों में औसत 12 से 15 फीसदी तक की बढ़ोतरी होने की संभावना थी। इससे पहले उत्तर प्रदेश पॉवर कारपोरेशन ने करीब 25 फीसदी बढ़ोतरी की मांग की थी। उनकी इस मांग का बड़ा विरोध होने के बाद बीच का रास्ता निकाला गया। सूबे में आम लोगों-किसानों के विरोध के बाद भी बिजली की दरों में दस से 15 प्रतिशत बढ़ोतरी की गई है।
नियामक आयोग उपभोक्ताओं पर लगने वाले 4.28 फीसदी सरचार्ज को भी खत्म करने जा रहा है। इस नुकसान की भरपाई भी पॉवर कारपोरेशन टैरिफ बढ़ोतरी करके करना चाह रहा है। यह बढ़ोतरी होने से सबसे अधिक बोझ 68 लाख शहरी उपभोक्ताओं पर ही पड़ेगा। दो से पांच किलोवाट तक उपभोक्ताओं के प्रतिमाह बिल में औसत 100 से 300 रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
प्रमुख बदलाव
– नियामक आयोग ने रेगुलेटरी सरचार्ज 4.8 प्रतिशत को समाप्त कर दिया है।
– ग्रामीण अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ता, जो पहले 1 किलोवाट पर 400 रूपया देते थे। अब उन्हें 500 रूपया देना पड़ेगा यानी कि 25 प्रतिशत वृद्धि।
गांव का अनमीटर्ड किसान जो 150 प्रति हार्सपावर देता था, अब उसे 170 प्रति हार्सपावर देना होगा यानी कि उसकी दरों में लगभग 14 प्रतिशत की वृद्धि।
– शहरी बीपीएल जो अभी तक एक किलोवाट में 100 यूनिट तक 3 रुपये प्रति यूनिट देता था, अब उसे सीमित कर एक किलोवाट में 50 यूनिट तक 3 रूपये तक सीमित कर दिया गया है।
– प्रदेश के शहरी घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में स्लैबवाइज लगभग 12 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की गई है।
– उद्योगों की दरों 5 से 10 प्रतिशत की वृद्धि की गई है।
अब जिलों को 24, तहसील को 20 और गांव को 18 घंटे बिजली आपूर्ति की जा रही है। पूर्व सरकारों में कोई रोस्टर नहीं था। बिजली सिर्फ चहेते जिलों को ही नसीब होती थी। (3/4) @BJP4India @UPGovt4818:12 pm – 3 सित॰ 2019Twitter Ads की जानकारी और गोपनीयता249 लोग इस बारे में बात कर रहे हैं
सुविधा बढ़ी है तो दर भी बढ़ी
ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने कहा कि प्रदेश में समाजवादी पार्टी के कार्यकाल में काफी कम जिलों में बिजली मिलती थी। अब योगी आदित्यनाथ सरकार में शहर में 24 घंटा तथा गावों में 18 घंटा बिजली दी जा रही है। यदि आपको सुविधा बेहतर मिल रही है तो उसी हिसाब से आपको भुगतान भी करना होगा।
अब जिलों को 24, तहसील को 20 और गांव को 18 घंटे बिजली आपूर्ति की जा रही है। पूर्व सरकारों में कोई रोस्टर नहीं था। बिजली सिर्फ चहेते जिलों को ही नसीब होती थी। (3/4) @BJP4India @UPGovt4818:12 pm – 3 सित॰ 2019Twitter Ads की जानकारी और गोपनीयता249 लोग इस बारे में बात कर रहे हैं
दाखिल होगी रिव्यू याचिका
मामले में उत्तर प्रदेश राज्य उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि जिस प्रकार से नियामक आयोग ने पावर कारपोरेशन की प्रस्तावित व्यवस्था पर मोहर लगायी है, यह पूरी तरह असंवैधानिक है। प्रदेश के 2 करोड़ 70 लाख उपभोक्ताओं के साथ आयोग ने धोखा किया है। उन्होंने कहा कि उपभोक्ता परिषद पूरे टैरिफ का अध्ययन कर रहा है। बहुत जल्द ही नियामक आयोग में एक रिव्यू याचिका दाखिल करेगा।
बिजली दरें बढ़ाने को लेकर प्रदेश सरकार विपक्ष के निशाने पर रही है। इसे लेकर पहले ही कयास लगाए जा रहे थे। दरों को लेकर राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने एलान किया था कि किसी भी हालत में बिजली दरों में बढ़ोतरी नहीं होने दी जाएगी।
परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा पावर कॉर्पोरेशन ने बीपीएल शहरी के स्लैब को 50 यूनिट तक सीमित कर उनकी दरों में लगभग 109 प्रतिशत की वृद्धि प्रस्तावित की है जो गरीबों के साथ अन्याय है। सुनवाई के दौरान बिजली कंपनियों की पोल खोली जाएगी।
करीब दो वर्ष बाद बढ़ोत्तरी
प्रदेश में करीब दो वर्ष बाद बढ़ोत्तरी की गई है। इससे पहले 2017 में बिजली की दरों में औसतन 12.73 फीसदी का इजाफा किया गया था। 2019 के लोकसभा चुनाव खत्म होने के फौरन बाद उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन ने सभी श्रेणियों के तकरीबन तीन करोड़ उपभोक्ताओं के लिए बिजली की मौजूदा दरों में जबरदस्त बढ़ोतरी का प्रस्ताव उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग में दाखिल किया था।
इसके तहत घरेलू बिजली की दरें 6.20 से 7.50 रुपये प्रति यूनिट तक प्रस्तावित थीं। कामर्शियल बिजली की दरें भी 8.85 रुपये प्रति यूनिट तक करने के साथ ही फिक्स्ड चार्ज को बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया था। तभी से माना जा रहा था कि प्रस्ताव अमल में आने पर सबसे ज्यादा चोट गरीब परिवारों पर पडऩा तय है।