क्रियायोग शिविर का समापन, सिखाई गई विभिन्न विधाएं

प्रयागराज। फरवरी 10, 2020 । माघ मेला में पावन गंगा के तट, मोरी रोड पर सेवारत क्रियायोग शिविर का आज समापन हुआ। प्रत्येक वर्ष की भाँति इस वर्ष भी भारत के अनेक लोगों के साथ-साथ अमेरिका, कनाडा, स्वीटज़रलैंड, जेनेवा, सिंगापुर, ब्राज़ील, नेपाल, साउदी अरेबिया, यूरोप से आकर लोग क्रियायोग साधना में भाग लिये। दस जनवरी से दस फरवरी तक पूरे महीने भर क्रियायोग शिविर में “ क्रियायोग का विस्तार – भारत राष्ट्र का निर्माण“ से सम्बंधित विषय, दर्शन व सिद्धान्त का प्रशिक्षण व अभ्यास कराया गया। क्रियायाग ध्यान से सत्य की अनुभूति होती है कि शरीर एक राष्ट्र है।

इस राष्ट्र में ब्रह्माण्ड की सभी रचनायें विद्यमान हैं जो पाँच अवरणों (कोषों) में सुशोभित है, जिन्हें अन्नमय कोष, प्राणमय कोष, मनोमय कोष, ज्ञानमय कोष व आनन्दमय कोष कहते हैं। अन्नमय कोष सभी प्रकार के अणु – परमाणुओं से भरा हुआ है, प्राणमय कोष सभी प्रकार के वनस्पतियों, मनोमय कोष सभी प्रकार के जीव – जंतुओं, ज्ञानमय कोष सभी प्रकार के मानवों व आनन्दमय कोष सभी प्रकार के देवी – देवताओं से सुशोभित है।


मनुष्य स्वरूप में सिर ऊपर तथा रीढ़ नीचे व्यवस्थित होने के कारण उसको पर्याप्त ज्ञान व शक्ति प्राप्त है। इस शक्ति व ज्ञान का उपयोग करके मनुष्य स्वरूप में व्यवस्थित सभी प्रकार के आवरणों को हटाकर ईश्वर से एकता की अनुभूति कर लेता है। इस प्रकार के मनुष्य राष्ट्र के सर्वांगीण विकास कर सकते हंै। उपस्थित विशाल जनसमूह को क्रियायोग को विस्तार से समझाते हुए गुरुदेव ने स्पष्ट किया कि क्रियायोग का अभ्यास वास्तविक पंचकोषी परिक्रमा है।

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