सनातन धर्म संस्कृति में नवप्राण फूंककर आदि शंकराचार्य जी ने किया मानवता पर उपकार

प्रयागराज । अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा प्रयागराज के तत्वावधान में राष्ट्रीय महासचिव श्री चन्द्रनाथ चकहा मधु जी के नेतृत्व में आज शंकराचार्य जयंति दारागंज स्थित मंदिर मनाया गया। देश में व्याप्त कोरोनावायरस के चलते सूक्ष्म रुप से कार्यक्रम किया गया।

इस अवसर महासभा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के वरिष्ठ सदस्य श्रवण कुमार शर्मा ने पूज्य शंकराचार्य जी के जीवन प्रकाश डाला और कहा कि प्रयाग में ही कुमारिल भट्ट को शंकराचार्य जी शास्त्रार्थ पराजित किया और देश में चार पीठों की स्थापना की, राष्ट्रीय महासचिव श्री चन्द्रनाथ चकहा मधु जी ने कहा कि परम पूज्य शंकराचार्य जी ने यहां आने पर गंगा स्नान और अक्षयवट जी का दर्शन लाभ प्राप्त किया था।

सनातन धर्म संस्कृति में नवप्राण फूंककर आदि शंकराचार्य जी (788- 820) ईस्वी में जो महान योगदान दिया वह भारतीय चेतना की महा धारा को प्रवाहमान बनाए हुए है। मंत्री माधवानंद शर्मा ने कहा आदि शंकराचार्य जी के अनुसार हर पल में पूर्णता का एहसास होना चाहिए। तभी कोई किसी चीज को पाने के लिए लालायित नहीं होंगे, पूज्य शंकराचार्य जी के अनुसार कोई भी मूर्तियों की पूजा कर सकते हैं, लेकिन ज्ञान और सजगता के साथ। प्रवक्ता अमित राज वैध ने कहा कि पूज्य शंकराचार्य जी ने यह विश्वास प्रवर्तित किया कि जीवन का आनंद है, दुख नहीं। भक्ति के प्रति दृष्टिकोण अलग होना चाहिए।जिसने सबकुछ त्यागकर संसार से मुंह मोड़ लिया । आदि शंकराचार्य जी की परम्परा में भिक्षु वो है जो उत्साह और आनंद से भरा हो।

शंकराचार्य जी के विचारों के अनुसार दुख नहीं है जीवन में जो सबको समान रूप से प्यार करे और जो बिना शर्त खुश रहें। वहीं असल जीवन जीने वाला व्यक्ति हैं। उक्त अवसर पर संरक्षक हरिजगन्नाथ शास्त्री,रामानंद शर्मा, सनद पांडेय, राजीव भारद्वाज, आनंद त्रिपाठी प्रदीप पाठक पवन पांडेय, अनिल मिश्रा, दिनेश तिवारी भय्यो महाराज, सुरेश शर्मा पुष्कर तिवारी राकेश शर्मा राहूल तिवारी चंदन तिवारी ऋषि शर्मा सहित अन्य तीर्थ पुरोहित प्रयागवाल प्रमुखरुप से उपस्थित रहे।

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