प्रयागराज। पूर्व आह्वान के सूचनानुसार उत्तर प्रदेश स्थित बहुजन समाज के सभी सामाजिक, सांस्कृतिक व कर्मचारी संगठनों के साथ-साथ आमजन मानस ने लाकडाउन का पालन करते हुये उत्तर प्रदेश सरकार की मजदूर किसान विरोधी और लोकतंत्र विरोधी लिये गये निर्णयों के ख़िलाफ़ पूरे उत्तर प्रदेश के जिले एवं ग्रामसभा स्तर पर भूख-हड़ताल करके अपना विरोध दर्ज कराया।

एक ओर जहां पूर्वांचल दलित अधिकार मंच (पदम) के संस्थापक उच्च न्यायालय के अधिवक्ता आईपी रामबृज ने महामहिम राज्यपाल व माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार को ईमेल के माध्यम से ज्ञापन मेल किया तो वहीं नगर प्रायागराज स्थित 185 मलिन बस्तियों के आमजन एवं मजदूरों ने अपनी बस्तियों में अपने घरों के सामने लाकडाउन का पालन करते हुये भूख-हड़ताल पर बैठ कर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लिये गये श्रमिक विरोधी निर्णयों का विरोध दर्ज किया।
पदम संस्थापक आईपी रामबृज ने बताया कि एक ओर जहां योगी सरकार ने श्रम कानून को तीन साल के लिये निरस्त करके घोर मजदूर विरोधी और पूंजीपतियों के हित में फैसला लिया है तो वहीं मण्डी कानूनों में संशोधन के जरिये किसानों को बड़े व्यापारियों और कंपनियों के हवाले कर दिया है।
अमीरों पर टैक्स न बढ़ाकर मोदी सरकार ने डीजल व पेट्रोल के दामों में भारी बृद्धि कर दी है जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इनके मूल्यों में रिकार्ड तोड़ गिरावट दर्ज की गयी है. हृदय रोगी, टीबी, कैंसर जैसे गंभीर बीमारी से ग्रस्त लोगों का इलाज़ नहीं किया जा रहा है जिससे रोज़ मौते हो रही है।
सरकार को अबिलम्ब कोरोना के अलावा गम्भीर बीमारियों का इलाज़ कराने की व्यवस्था करनी चाहिये. अमीरों पर अधिक टैक्स लगाओ श्रम कानूनों को तीन साल के लिये रद्द करने का निर्णय वापस लो. काम के आठ घण्टे से बारह घण्टे का निर्णय वापस लो. न्यूनतम वेतन रुपया 21हजार करो. सभी संगठित असंगठित, सरकारी और गैर सरकारी विभागों, उद्यमो में संविदा अथवा अन्य श्रमिकों के बकाया वेतनों का भुगतान सुनिश्चित किया जाय।
सभी प्रवासी मजदूरों की घर वापसी सरकारी खर्च से कराया जाय. हर एक श्रमिक दिहाड़ी मजदूरों तथा गरीब एवं आयकर से बाहर नागरिकों को साढ़े सात हजार रुपये हर महीने दो. हर काम करने योग्य व्यक्ति को पूर्ण रोजगार सुनिश्चित किया जाय।
राशनकार्ड अथवा गैर राशनकार्डधारी हर परिवार को 35 किलो खाद्यान्न हर महीने निःशुल्क देना सुनिश्चित किया जाय. किसानों के उत्पाद-अनाज, सब्जी, फल, दूध आदि को उचित मूल्य पर खरीदना सुनिश्चत करो. मौसम से प्रभावित गेहूँ की भी खरीद की जाय।
प्रत्येक खरीद का तत्काल भुगतान किया जाय. वर्षा और ओलावृष्टि से बर्बाद फसलों का मुआवजा तत्काल दिया जाय. मंडी कानून में किसान विरोधी संशोधन वापस लिया जाय. कुटीर, लघु, माध्यम उद्योगों और छोटे व्यापारियों के लिये राहत पैकेज की घोषणा की जाय।
दलितों, अल्पसंख्यकों, कमजोर तबकों और महिलाओं का उत्पीड़न और उनपर हिंसा रोकी जाय. लाकडाउन के नामपर आम नागरिको पर जुल्म और तानाशाही रवैया तत्काल बन्द किया जाय. साम्प्रदायिकता और नफ़रत की राजनीति बन्द की जाय।
प्रायागराज स्थित पूरामुफ्ती, पंतरवा, मोहिद्दीनपुर, बमरौली उपरहार, चक मीरा पट्टी, हरवारा, महिला ग्राम, ताड़बाग, नीवा, प्रीतम नगर, कालिंदीपुरम, राजरूपपुर, बेनीगंज, शाहराराबाग, कटघर, मुट्ठीगंज, कीटगंज आदि मलिन बस्तियों की चौका बर्तन करने वाली महिलाओं एवं उनके मजदूर पतियों ने इस भूख हड़ताल में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया।