वैदिक विधान और यज्ञ अनुष्ठान से पराजित होगा कोरोना: शंकराचार्य जी

लखनऊ (अनुराग शुक्ला)। पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य अधोक्षजानंद देवतीर्थ जी महाराज का कहना है कि प्रकृति को चुनौती देने का दुष्परिणाम ही कोरोना जैसी महामारियों के प्रभावी होने का कारण होता है। उन्होंने कहा कि प्रकृति की सेवा, वैदिक विधान के अनुपालन और यज्ञ अनुष्ठान से इस महामारी को आसानी से पराजित किया जा सकता है।

जगद्गुरु ने बताया कि आद्य शंकराचार्य धर्मोत्थान संसद के द्वारा यज्ञ अनुष्ठान और सेवा कार्य लाॅकडाउन के दौरान निरंतर जारी है।

एक विशेष वार्ता में शंकराचार्य देवतीर्थ ने कहा कि यह वायरस जनित महामारी धरती पर कोई पहली बार नहीं आयी है। इतिहास प्रमाण है, जब-जब मानव प्रकृति का दोहन प्राकृतिक व वैदिक नियमों के विरुद्ध करने लगता है तो प्रकृति स्वयं उसपर नियंत्रण करने के लिए इस तरह की आपदाएं लेकर आती है।

उन्होंने सुझाव दिया है कि मनुष्य विकास के नाम पर प्रकृति का अत्यधिक दोहन करना बंद कर दे। पेड़-पौधों को काटें नहीं बल्कि उनकी पूजा करें। पहाड़ों को उनके स्वरुप में रहने दें। साथ ही नदियों को बंधन से मुक्त कर उन्हें स्वछंद अपनी धारा में बहने दें। हमारे वैदिक शास्त्रों में प्रकृति के साथ खिलवाड़ करने की मनाही है। इसके अलावा यज्ञ आदि अनुष्ठानों का अनवरत संचालन हो तो विषाणु जनित रोग स्वतः समाप्त हो जाएंगे।

यज्ञ से नष्ट होते हैं विषाणु

एक सवाल के जवाब में शंकराचार्य ने कहा कि यज्ञों में प्रकृति द्वारा ही प्रदत्त तमाम औषधीय गुणों वाली जड़ी-बूटियों की समिधा तैयार कर आहुति दी जाती है, जो वायुमंडल को स्वच्छ और स्वस्थ रखता है। साथ ही यज्ञ के धुएं में हर तरह के विषाणु को नष्ट करने की क्षमता होती है। जगद्गुरु ने कहा कि इस ब्रह्मांड का सृजन परमात्मा ने किया है। इसके सकुशल संचालन के लिए एक विधान भी बनाया है। उस विधान को कार्यान्वित करने की जिम्मेदारी मनुष्य को दी गई है। इसलिए मनुष्य को धर्मानुशासित रहकर विधि के विधान के अनुसार प्रकृति और हर जीव की रक्षा करनी चाहिए। अब तो वैज्ञानिक भी मानने लगे हैं कि प्रकृति के साथ छेड़छाड़ हो रही है। ऐसे में मानव को सतर्क होकर धर्मानुशासित जीवन जीना चाहिए।

आद्य शंकराचार्य धर्मोत्थान संसद का सेवा कार्य जारी

जगद्गुरु ने बताया कि गोवर्धन मठ की संस्था आद्य शंकराचार्य धर्मोत्थान संसद द्वारा मथुरा के गोवर्धन में लाॅकडाउन के दौरान यज्ञ अनुष्ठान और सेवा का क्रम अनवरत जारी है। वहां यज्ञ के अलावा भगवान चन्द्र मौलेश्वर का महाअभिषेक, राज राजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी की आराधना एवं श्रीचक्र सहस्त्रार्चपन की पूजा चल रही है। लाॅकडाउन के कारण श्रद्धालु लोग अपने घरों से ही इस पूजन में आॅनलाइन भागीदारी कर रहे हैं।

आद्य शंकराचार्य धर्मोत्थान संसद के तत्वाधान में कोलकाता प्रसिध्द उद्योगपति श्री बिनोद बागरोदिया के प्रपौत्र कौशल बगड़ोदिया के सौजन्य से गोवर्धन में पिछले करीब डेढ़ माह से बंदरों और गायों को नियमित भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही आस-पास के गांवों के गरीब व जरुरतमंद लोगों को खाद्य सामग्री वितरित की जा रही है। इस खाद्य सामग्री में आटा, चावल और दाल के अलावा नमक, तेल, गुड़, मसाले और आलू व हरी सब्जियां भी दी जा रही हैं।
एक अन्य सवाल के जवाब में शंकराचार्य देवतीर्थ कहते हैं कि गोवर्धन की तलहटी में विचरण कर रही गायें व बंदर परमात्मा के स्वरूप हैं। त्रेता युग में भगवान राम ने गाय की सेवा का संकल्प लिया लेकिन उनकी यह सेवा अधूरी रह गई थी। इसीलिए द्वापर युग में कृष्ण के अवतार में उन्होंने गोपालक के यहां जन्म लेकर गिरिराज जी की तलहटी में गोचारण लीला की। उन्होंने बताया कि श्रीराम ने भी बंदरों को द्वापर में मिलने का वचन दिया था। इसीलिए गोवर्धन में आज भी काफी संख्या में गायें और बंदर प्रभु आश्रित हैं, जिन्हें श्रद्धालु ही चारा खिलाते हैं। लेकिन, लाॅकडाउन श्रद्धालुओं का आना बंद है। ऐसे में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा सरंक्षित किये गये वानर व गाय की सेवा आवश्यक है।
क्षेत्र के वरिष्ठ नेता कुवंर नरेन्द्र सिंह ने कहा लाकडाउन के कारण गरीब जनता की स्थिति बहुत दयनीय हो गयी है ऐसे में संस्था द्वारा किया जा रहा सेवा कार्य बडा ही सराहनीय है । साथ ही शंकराचार्य जी के सानिध्य में गायों और बंदरों को भोजन उपलब्ध कराने से बेजुबानो को भी एक संबल मिला गया है । कार्यक्रम में पुलिस क्षेत्राधिकारी गोवर्धन जितेन्द्र सिंह सपत्नीक उपस्थित थे ।

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