सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न करने वालों को फौरी राहत

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सलाह दी है कि कोविड-19 के मानकों का पालन न करने वालों को जेल न भेजकर उन्हें जागरूक किया जाए।

कोर्ट ने कहा कि सूबे की जेलों में पहले से काफी भीड़ है। ऐसे में कोरोना संक्रमण पर लगाम के लिए सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का पालन न करने वालों को जेल भेजने से संक्रमण को बढ़ावा मिलेगा।

कोर्ट ने कहा कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह कोरोना वायरस से निपटने के लिए केंद्र सरकार की गाइड लाइन का पालन करे।
यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल एवं न्यायमूर्ति एसडी सिंह की खंडपीठ ने ताजगंज आगरा के मुन्ना व छह अन्य की याचिका पर अधिवक्ता दिनेश कुमार मिश्र को सुनकर दिया है। कोर्ट ने कहा कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न करने पर दर्ज एफआईआर से अपराध बनता है ।

लेकिन याचियों को एक अवसर दिया जाए कि वे एसएसपी आगरा के समक्ष कोविड-19 की गाइडलाइन का पालन और भविष्य में उल्लंघन न करने का आश्वासन दाखिल करें तो एसएसपी विचार कर उस पर निर्णय लें।

कोर्ट ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न करने पर दर्ज मुकदमे की विवेचना में सहयोग करने की शर्त पर पुलिस रिपोर्ट दाखिल होने तक याचियों की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी।

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