
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार) । राजर्षि टंडन महिला डिग्री कॉलेज की ओर से अवसाद के रहस्यों का अनावरण विषय पर एक राष्ट्रीय वेबिनार हुआ। प्राचार्या डॉ. रंजना त्रिपाठी ने कहा कि अवसाद एक मानसिक बीमारी है।
शारीरिक रूप से कोई बीमारी होती है तब लोगों की सहानुभूति उसके प्रति सहज ही उत्पन्न हो जाती है किन्तु जैसे ही अवसाद का प्रकरण आता है उसे कलंक मान लिया जाता है।
अधिशासी निकाय की चेयर पर्सन डॉ. शशि टंडन ने अतिथियों का स्वागत किया। मुख्य वक्ता मनोचिकित्सक डॉ. आलोक वाजपेयी ने कहा कि यदि दिमाग शान्त रहे तो डिप्रेशन समाप्त हो जाता है। 85 फीसदी लोगों का डिप्रेशन अपने आप ठीक हो जाता है। बाकी 15 फीसदी लोगों को दवा देकर ठीक करना पड़ता है।
डॉ. सौरभ टंडन ने कहा कि डिप्रेशन हमारी सोच से आता है । ध्रुवराज शर्मा ने खुश रहने के महत्व को विस्तार से समझाया।
ज्योत्सना सिन्हा ने कहा कि डिप्रेशन की अवस्था मे रासायनिक असंतुलन होता है। डॉ. नीलम बेहरे, दयाशंकर सिंह, डॉ. मंजू सिंह आदि ने विचार व्यक्त किए।