11 वार्डों के बीच एक कोटेदार ,मनमानी से उपभोक्ता हैरान
कार्डधारकों की भारी फजीहत पर जिम्मेदार साधे है चुप्पी
कोरांव,प्रयागराज ( अनुराग दर्शन समाचार )। 3 हजार कार्डधारकों के बीच एक ही कोटे की दुकान होने से लोगो को भारी फजीहत का सामना करना पड़ रहा है ।नगर पंचायत कोरांव में 11 वार्डों के सापेक्ष एक ही सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान होने से कार्डधारक कई बार दुकान का चक्कर लगाकर थक हार जाते हैं फिर भी राशन नहीं मिलता है। कभी मशीन खराब है, कभी मशीन का चार्ज खतम है, कभी आज अपने कार्ड धारकों को राशन वितरण करेंगे। कल आना, परसों आना आदि की भीषण समस्या से कार्ड धारक परेशान रहते हैं। इसके पूर्व में नगर पंचायत में कोटे की दो दुकानें थी जिसमें एक दुकान अनियमितता के आरोप में निलंबित कर दी गई थी। जिसके सापेक्ष इस समय मात्र एक ही कोटे की दुकान होने से राशन कार्ड धारकों को अत्यंत कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उक्त संदर्भ में सप्लाई इंस्पेक्टर से बात की जाती है तो उत्तर मिलता है रोंग नंबर है। कभी स्विच ऑफ रहता है, कभी कभार फोन भी लगा तो कुछ न कुछ बहाना बनाकर बात खतम कर दी जाती है। इससे कार्ड धारकों को जितनी जलालत झेलनी पड़ती है वही जानता है। सवाल इस बात का है कि सरकार जनता की भलाई के लिए फरमान तो जारी कर देती है किंतु धरातल पर विभागीय कर्मियों द्वारा जो शोषण आम जनता का किया जाता है वह तो भुक्तभोगी ही जानते हैं। बता दें कि चार बजे भोर से ही कार्ड धारक लंबी कतार लगाकर कोटेदार के गोदाम के पास धक्का-मुक्की करते नजर आते हैं। इतने पर भी राशन नहीं मिल पाता है। आखिर में इसका जिम्मेदार कौन है, ? राशन कार्ड धारकों ने इस भीषण समस्या के समाधान के लिए जिलाधिकारी प्रयागराज का ध्यान आकृष्ट कराते हुए तत्काल नगर पंचायत कोरांव में नई दुकानों के आवंटन की मांग की है। साथ ही दोषी व अनियमितता बरत रहे नगर पंचायत कोरांव के कोटेदार पर जांच कर कार्रवाई की भी मांग की है। ज्ञातव्य हो कि लगभग नगर पंचायत कोरांव में पच्चीस हजार के ऊपर आबादी है। जहां पर 3000 से अधिक कार्ड धारक हैं। ऐसे में एक ही राशन की दुकान होने से प्रत्येक महीने कार्ड धारकों को सरकारी राशन प्राप्त करने में भारी जलालत झेलनी पड़ रही है। नई दुकानों के आवंटन की मांग लगातार सभासद एवं नगरवासी कर रहे हैं, किंतु स्थानीय प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है मामले में कोई ठोस कार्रवाई न होने से लोग आक्रोशित हैं।



