करवाचौथ का व्रत इस बार शिव-अमृत योग का दुर्लभ संयोग

सुख-समृद्धि की कामना पूर्ति को सुहागिनो ने की खूब खरीदारी

( अनुराग शुक्ला )
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी अर्थात करक चतुर्थी पर बुधवार को करवाचौथ का व्रत रखा जाएगा। इस बार शिव-अमृत योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। सुख-समृद्धि की कामना पूर्ति को सुहागिन महिलाएं दिनभर निर्जला रखेंगी। शाम को मेहंदी रचे हाथों में लाल चूड़ी, मांग में सिंदूर, लाल साड़ी, आभूषण सहित सोलह श्रृंगार करके मां गौरी, भगवान शंकर, गणेश व कार्तिकेय का पूजन करेंगी। व्रत को लेकर महिलाओं में खासा उत्साह है। मेहंदी रचवाने के लिए मंगलवार को सिविल लाइंस चौराहा पर खासी भीड़ रही। वहीं, पार्लर में महिलाएं मेकअप कराने पहुंचीं।
वहीं, चलनी, करवा, फल व पूजन सामग्री की खरीदारी की गई।करवा चौथ पर हर बार मां ललिता देवी, अलोपशंकरी, सावित्री मां सहित देवी मंदिरों में सामूहिक कथा का पाठ किया जाता था। कोरोना संक्रमण के कारण इस बार कहीं सामूहिक कथा नहीं होगी। व्रती महिलाओं को घर में पूजा करनी होगी।
आचार्य सोनू जी महाराज बताते हैं कि करवाचौथ व्रत में चंद्रमा की पूजा धार्मिक व वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। चंद्रमा मन का कारक व औषधियों को संरक्षित करता है। कार्तिक मास में औषधियों के गुण विकसित अवस्था में होते है। यह गुण उन्हें चंद्रमा से ही प्राप्त होता है। ये व्यक्ति के स्वास्थ्य और निरोगी काया को बनाता है। करवाचौथ के व्रत में चंद्रमा को अघ्र्य देने का विधान इसी कारण है। इससे मानव को आयु, सौभाग्य और निरोगी काया की प्राप्ति होती है। जबकि चलनी से देखने पर चंद्रमा की सकारात्मक किरणें शरीर में प्रवेश करती हैं।




