तहसीलदार नहीं बदल सकता जमीन की प्रकृति
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रद्द किया तहसीलदार का आदेश
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि तहसीलदार को किसी जमीन की प्रकृति बदलने का अधिकार नहीं है। तहसीलदार को बंजर भूमि को नवीन परती कर सड़क दर्ज करने का क्षेत्राधिकार नहीं है। इसी के साथ कोर्ट ने जौनपुर जिले में नीभापुर गांव से संबंधित तहसीलदार मछलीशहर के 23 फरवरी 2020 के आदेश को रद्द कर दिया है। साथ ही कहा कि राज्य सरकार को किसी भी भूमि को लेने का अधिकार है। बंजर भूमि गांव सभा की होने के नाते सरकार की है। यदि सड़क बनाना जरूरी हो तो सरकार जमीन लेकर सड़क बना सकती है।
यह आदेश न्यायमूर्ति अंजनी कुमार मिश्र ने विश्वनाथ बाबुल सिंह की याचिका पर अधिवक्ता विनोद शंकर गिरी को सुनकर दिया है। याची का कहना था कि मछलीशहर तहसीलदार ने नीभापुर गांव स्थित प्लाट 473 व 474 को नवीन परती दर्ज कर सड़क बनाने का आदेश दिया है। याचिका में कहा गया कि तहसीलदार को किसी जमीन की प्रकृति बदलने का अधिकार नहीं है, जिसे कोर्ट ने सही माना। सरकार की तरफ से कहा गया कि तहसीलदार धारा 25 में रास्ते का विवाद तय कर सकता है इसलिए ऐसा किया गया। कोर्ट ने इसे नहीं माना और कहा कि रास्ते के विवाद को तय करने के अधिकार के तहत जमीन की प्रकृति नहीं बदली जा सकती।



