Latest

हत्या के प्रयास का आरोपपत्र गलत तब्लीगी जमात पर पुलिस की विवेचना खारिज

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिल्ली में तब्लीगी जमात में शामिल हो वापस मऊ आने पर पुलिस द्वारा मुकदमा दर्ज कर विवेचना में हत्या का प्रयास करने का आरोपपत्र दाखिल करने को कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग माना है।

कोर्ट ने कहा कि पुलिस का यह कृत्य कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है।

हाईकोर्ट ने याची मोहम्मद साद के खिलाफ मऊ के जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में आईपीसी की धारा 307 व 270 के तहत दाखिल आरोप पत्र में मुकदमे की प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगा दी है।

कोर्ट ने एसएसपी व क्षेत्राधिकारी मऊ से इस प्रकार के मामले में धारा 307 के तहत दाखिल आरोप पत्र पर उनका व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है। यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट ने चार्जशीट दाखिल करने के खिलाफ मो. साद की अर्जी पर सुनवाई करते हुए दिया है।

कोर्ट ने आपराधिक मामले की सुनवाई पर अग्रिम आदेश तक के लिए रोके लगा दी है।
याची का कहना है कि पुलिस ने पहले इस मामले में आईपीसी की धारा 269, 270 के तहत आरोप पत्र दाखिल किया था। बाद में क्षेत्राधिकारी के कहने पर आरोप पत्र में संशोधन किया गया और 307 व 270 के तहत संशोधित आरोप पत्र दाखिल किया गया। कहा गया कि प्राथमिकी में दर्ज आरोप को सही भी मान लिया जाए तो याची के खिलाफ हत्या के प्रयास का आरोप लगाना सही नहीं ठहराया जा सकता है। कोर्ट ने इस मामले में प्रदेश के डीजीपी, एसएसपी मऊ व क्षेत्राधिकारी को भी पक्षकार बनाने को कहा।

मामले के तथ्यों के अनुसार याची पर आरोप है कि वह दिल्ली मरकज की मीटिंग में शामिल होकर लौटा था। उसने यह जानते हुए भी कि तब्लीगी जमात में शामिल लोग कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं, दिल्ली से लौटने के बाद छिपाए रखा। अपना मेडिकल परीक्षण नहीं कराया। बाद में सूचना मिली कि दिल्ली से लौटे कुछ लोग कोरेन्टीन हैं। मेडिकल परीक्षण में याची की रिपोर्ट निगेटिव आई थी।

Related Articles

Back to top button