बाह्य विज्ञान से मनुष्य को सच्ची शान्ति कभी मिल ही नहीं सकती- शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानन्द

(अनुराग शुक्ला)प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। आज माघ मेला स्थित श्री काशी सुमेरु पीठाधीश्वर जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानन्द सरस्वती जी महाराज के शिविर के पण्डाल में काशी से पधारे श्रीमद्भागत कथा के मर्मज्ञ भागवताचार्य डा० प्रभाकर त्रिपाठी जी ने अपने प्रवचन के क्रम में भगवान की कथा कब से प्रारम्भ हुई ? और भगवान की कथा मानव मात्र के जीवन मे कितनी उपयोगी है ?
आदि विषयों पर बहुत ही सरल भाषा में एवम् विस्तार से अनेकानेक उद्धरण के साथ पण्डाल में उपस्थित सनातन धर्मावलम्बी श्रद्धालुओं का अपना प्रवचन प्रदान किया | मंच पर विराजमान श्री काशी सुमेरु पीठाधीश्वर यति सम्राट अनन्त श्री विभूषित पूज्य जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानन्द सरस्वती जी महाराज ने अपना आशीर्वचन एवम् उपदेश प्रदान करते हुए कहा कि इस समय चारों ओर अनेकों राजनीतिक एवम् आर्थिक वादों का ऐसा भयंकर जाल फैल गया है ।
जिसके कारण जिन महान दार्शनिक वादों ने हमारे ब्यक्तिगत और सामाजिक जीवन को चिन्तनशील बनाकर आध्यात्मिक उत्कृष्टता की ओर प्रवृत्त कर रखा था, उनकी चर्चा ही बन्द हो गयी है।
इसी के परिणामस्वरूप आज चारों ओर राग-द्वेष और हिंसा-प्रतिहिंसा का प्रबल प्रवाह बह रहा है एवम् समाज की भयानक दुर्दशा हमारे सामने देखने को मिल रही है।
पूज्य शंकराचार्य भगवान ने कहा कि बाह्य विज्ञान से मनुष्य को सच्ची शान्ति कभी मिल ही नहीं सकती।
उपनिषदुक्त आत्मस्वरूप के सम्यक ज्ञान से ही मनुष्य शोक-मोह से निवृत्त होकर शाश्वती शान्ति को प्राप्त कर सकता है, इसके अतिरिक्त अन्य कोई मार्ग है ही नहीं।
उपनिषद वाक्य तथा तद्नुसार चलकर शान्ति को प्राप्त करने वाले महापुरुषों के पवित्र जीवन इसके प्रमाण हैं।
आज भी सनातन धर्मावलम्बी अपने उपास्यदैवत श्री राजराजेश्वरी, चन्द्रचूड, लक्ष्मी-नृसिंह के चरणों में प्रार्थना कर उपनिषद्-चिन्तन में आने वाली समस्त विघ्न बाधाओं को दूर करके अपने सच्चिदानन्द-स्वरूप का साक्षात्कार कर सकते हैं।
इस प्रकार जब मनुष्य अपने जीवन में सच्ची शान्ति प्राप्त कर लेगा, तभी पृथ्वी पर सच्ची शान्ति के शुभ साम्राज्य की स्थापना सम्भव हो पायेगी।




