सिफरी द्वारा गंगा नदी में बीस हजार मत्स्य बीज छोड़ा गया

(अनंत पांडेय) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार ) । पवित्र पावन गंगा तट पर स्थित माण्डा के नरवर चौखट्टा गांव में विलुप्त हो रहे मत्स्य प्रजातियों के संरक्षण एवम् संवर्धन को ध्यान में रखते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद केन्द्रीय अंतर्स्थलीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (सिफरी) प्रयागराज के द्वारा गंगा नदी में 20000 (बीस हजार) भारतीय प्रमुख कार्प-कतला,रोहू,मृगल मछलियों के बीज को रैंचिंग कार्यक्रम के तहत छोड़ा गया,राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एन एम सी जी) के अन्तर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में संस्थान के केन्द्राध्यक्ष डा० डी एन झा ने उपस्थित लोगों को नमामि गंगे परियोजना के बारे में जानकारी दी जिसके अन्तर्गत पुरे गंगा नदी में कम हो रहे महत्वपूर्ण मत्स्य प्रजातियोें के बीज का रैंचिंग होना रखा है साथ ही लोगो को गंगा के जैव विविधता अैार स्वच्छता के बारे में जागरूक करना है,संस्थान के वैज्ञानिक डा० अबसार आलम ने समारोह में आये हुए सभी अतिथियों का स्वागत किया तथा रैंचिंग के महत्व को बताया,कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में राजेश शर्मा संयोजक गंगा विचार मंच प्रयागराज ने भाग लिया, उन्होने गंगा के महत्व तथा इसके संरक्षण के बारे में लोंगो को अवगत कराया एवम गंगा के जैव विविधता को बचाने के लिए उपस्थित लोगो से आह्वान किया,इस अवसर पर मुख्य अतिथि मानवेंद्र सिंह पूर्व अधिकारी भारतीय खाद्य निगम भारत सरकार ने भाग लिया और सभा को सम्बोधित किया,उन्होने कहा कि गंगा है तो मानव सभ्यता है,इसलिए सभी को गंगा के प्रति जागरूक होना चाहिए साथ ही गंगा को स्वच्छ रखने का संकल्प व्यक्त किया,कार्यक्रम में गंगा विचार मंच,आस-पास गाव के मत्स्य पालक,मत्स्य व्यवसायी तथा गंगा तट पर रहने वाले स्थानीय लागों ने भाग लिया,कार्यक्रम के अन्त में संस्थान के वैज्ञानिक डा० वेंकटेश ठाकुर ने धन्यवाद ज्ञापन किया, कार्यक्रम में संस्थान के शिव जनम वर्मा, जितेन्द्र कुमार, राम सजीवन आदि ने भाग लिया तथा सभा को सम्बोधित किया ।




