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यूपी बोर्ड: 20 से 45 फीसदी हो गईं छात्राएं

( अनंत पांडेय ) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। सूबे में बालिका शिक्षा की स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है। पिछले तीन दशक में 10वीं की परीक्षा में छात्राओं की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है।

तीन दशकों में लगातार बढ़ा बालिका परीक्षार्थियों का ग्राफ

इस संख्या (प्रतिशत) में दोगुने से अधिक का इजाफा हो गया है जो शुभ संकेत है। दुनिया की सबसे बड़ी परीक्षा कराने वाले यूपी बोर्ड से हाईस्कूल की परीक्षा के लिए पंजीकृत छात्र-छात्राओं की संख्या इस बात की पुष्टि करते हैं। वर्ष 1991 की हाईस्कूल परीक्षा के लिए पूरे उत्तर प्रदेश में कुल 17,75,602 परीक्षार्थी पंजीकृत थे। इनमें से 14,04,519 (79.10 प्रतिशत) बालक और 3,71,083 (20.89 प्रतिशत) बालिकाएं थीं।
आंकड़ों से साफ है कि 10वीं की परीक्षा के लिए पंजीकरण कराने वाले पांच में से चार छात्र और सिर्फ एक छात्रा थी। इसके ठीक तीन दशक बाद 2021 की हाईस्कूल परीक्षा के लिए पंजीकृत कुल 29,94,312 परीक्षार्थियों में से 1674022 (55.90 फीसदी) बालक और 1320290 (44.09 प्रतिशत) बालिकाएं हैं। वहीं इंटरमीडिएट की बात करें तो 1991 में 25 प्रतिशत छात्राएं थीं। जो 2021 में 43.50 फीसदी हो गई है। ये आंकड़े इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि यूपी बोर्ड से पढ़ाई करने वाले छात्र छात्राएं आमतौर पर मध्यम, निम्न मध्यम या गरीब तबके से आते हैं।
दसवीं की परीक्षा में बालिका परीक्षार्थियों पर नजर डालें तो इनकी हिस्सेदारी वर्ष 1991 में 20.89 फीसदी, 1995 में 23.88 फीसदी, 2000 में 25.42 फीसदी, 2005 में 32.98 फीसदी, 2010 में 40.53 फीसदी, 2015 में 45.27 और 2021 में 44.09 फीसदी रही है। यूपी बोर्ड की पूर्व सचिव नीना श्रीवास्तव के अनुसार समाज में बालिका शिक्षा को लेकर जागरुकता बढ़ी है। यूपी बोर्ड परीक्षाओं में छात्राओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो सुखद है।

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