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बिना मांगे काल्विन अस्पताल को भेजे 37 लाख के इंजेक्शन

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। कोरोना महामारी जब कहर ढा रही थी, तब सरकारी अस्पतालों में इंजेक्शन, दवाओं और ऑक्सीजन को लेकर हंगामा मचा था। इस बीच मोतीलाल नेहरू जिला चिकित्सालय (कॉल्विन) में बिना जरूरत और बगैर मांग किए 37 लाख आठ हजार कीमत के इंजेक्शन भेज दिए गए। टिटनेस इम्यूनोग्लोबिन 250 यूनिट के ये इंजेक्शन अस्पताल क्यों भेजे गए, यह बड़ा सवाल है।

यह इंजेक्शन टिटनेस के गंभीर रोगियों को लगाया जाता है। काल्विन अस्पताल में इस बीमारी से संबंधित रोगी कई साल से भर्ती ही नहीं हुए। पहली खेप अप्रैल में भेजी गई थी। अस्पताल प्रशासन ने मना कर दिया था तो अब जून में दूसरी खेप भेज दी गई। अस्पताल प्रशासन का दावा है कि इसे भी वापस कर दिया गया है। अस्पताल को इस महंगे इंजेक्शन की जरूरत ही नहीं थी। बिना मांगे ये इंजेक्शन भेजे क्यों गए, आगे यह इंजेक्शन कहां सप्लाई हुए, इसका जवाब अस्पताल प्रशासन के पास नहीं है। न ही यह जानने की कोशिश अब तक की गई। इंजेक्शन की आपूर्ति भारत सीरम एंड वैक्सीनेस लिमिटेड ने की है। इंजेक्शन की खेप के साथ बिल्टी और जीएसटी समेत अन्य टैक्स के कागजात अस्पताल प्रशासन के पास पहुंचे तो खलबली मच गई। मांग, आपूर्ति और मरीजों की जरूरत वाली दवाओं से संबंधित दस्तावेज खंगाले गए।
एक अप्रैल को जब इंजेक्शन की पहली खेप आई थी तभी चीफ फार्मासिस्ट ने साफ कर दिया था कि इस दवा के लिए इस अस्पताल की ओर से कोई मांग पत्र नहीं दिया गया और न ही इसका यहां उपयोग होता है। 16 जून को दूसरी खेप भेज दी गई। इंजेक्शन के साथ भेजे गए दस्तावेज में कीमत 37 लाख आठ हजार रुपये लिखी है। बिल टू पार्टी के आगे उत्तर प्रदेश मेडिसिन सप्लाई, सुधा बिल्डिंग गोमती नगर लखनऊ तो शिप टू पार्टी के आगे एमएलएन अस्पताल इलाहाबाद- सीएमओ- सीएमएस लिखा है। बिल उत्तर प्रदेश सरकार के नाम है। पूरा मामला अभी स्पष्ट तो नहीं हो सका है पर चर्चा है कि यह दवा खरीद की बड़ी गड़बड़ी हो सकती है।
सीएमएस डॉ. सुषमा श्रीवास्तव का कहना है कि जाने क्यों इसे काल्विन अस्पताल भेजा गया। उन्होंने अंदेशा जताया कि हो सकता है कि यह मेडिकल कालेज के लिए आया हो।

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