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बड़े हादसे को न्योता दे रहा रेलवे कालोनियों के मकानों पर पेड़

रात मे कब्रबिजजूओ का आतंक रहता है जो पुराने क्वाटर खाली पड़े है। उसमे ये डेरा डाले है

कर्मचारी अपने ही विभाग से परेशान हैं कि उनका कोई सुनने वाला नहीं है

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार ) । जहां करोड़ों रुपए की कमाई करने वाला रेलवे विभाग अपने कर्मचारियों को सुरक्षित नहीं रख पाने में असमर्थ दिखाई देता हैं । प्रयागराज स्टेशन के सिविल लाइन साइड कॉलोनी का बुरा हाल है । चौराहों चौराहों पर कई जगह पेड़ सूखे गिरे हुए हैं। जो वहां रह रहे कर्मचारियों के आवास पर लटके हुए हैं । जो कभी भी बड़े हादसे को दावत दे रहा है । रेलवे कॉलोनी की गलियों के सड़कों पर स्ट्रीट लाइट तो लगी हुई है पर जलते नहीं। हमेशा अंधेरा बना रहता है । जिससे आने जाने में कर्मचारियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है । लोको पायलट कॉलोनी दसवां मार्ग नवा मार्ग की हालत बहुत ही दयनीय है । दसवां मार्ग पर तो 3 पेड़ गिरे हुए हैं। जो पुरानी बिल्डिंग ऊपर हैं । इसकी सूचना उच्च अधिकारियों तक दिए जाने के बाद भी कोई कर्मचारी हाल लेने नहीं आया । अब तक यहां के स्थानीय निवासियों ने अपने अधिकारियों को बार-बार अवगत कराया पर कहकर टाल देते है की हमारे पास आदमी नही है । यदि चाहे तो बाहर से लेबर करके कार्य करवा सकते है । पर वही दसवें मार्ग पर एक सूखे ताड का पेड़ है । जो कभी भी गिरने की स्थिति में है पर इस पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है । यदि कोई भी अप्रिय घटना ना हो सके। इसके लिए वहां रहने वाले कर्मचारियों ने विभाग में टेलीफोन से सूचना भी दी परंतु अधिकारियों के कान में जूं तक नहीं रहेगा वही अधिकारियों द्वारा जो इनका काम ठेके पर दिया जाता हैं । वह अपने मन मुताबिक अपने खास लोगों से काम करवाते है । जिससे अधिकारियों का कमीशन बन सके । उन्हें अभी हाल में कालोनियों में पुराने बाथरूम की जगह नए बाथरूम का कार्य ठेकेदार को दिया गया। जो अभी तक पूरा काम नहीं कंप्लीट हो पाया ।वही अभी रेलवे ने कालोनी में किचन मे टाइलस रेलवे की तरफ से ठेके पर लगा है । किसी के यहाँ पूरा लगवाये है तो किसी के यहाँ केवल काउंटर पर। जबकि यहाँ रात मे कब्रबिजजूओ का आतंक रहता है । जो पुराने क्वाटर खाली पड़े है। उसमे ये डेरा डाले है । वही कालोनी में जितनी स्ट्रीट लाइट लगी है । एक भी नही जलती रात मे बिल्कुल अँधेरा रहता है । जिसके लिए कई बार कम्पलेंट किया गया लेकिन कोई सुनवाई नही होती। कर्मचारी अपने ही विभाग से परेशान हैं कि उनका कोई सुनने वाला नहीं है।

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