काशी विश्वनाथ धाम लोकार्पण कार्यक्रम में शामिल होंगे प्रयागराज के संत

( अनुराग शुक्ला ) वाराणसी (अनुराग दर्शन समाचार)। देवाधिदेव महादेव भगवान शिव की नगरी के रूप में जग विख्यात है। इसे सामान्य श्रद्धालु काशी के रूप में भी जानते हैं, ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव आज भी साक्षात् काशी में विराजमान हैं। यहाँ मोक्षदायनी माँ गंगा के दर्शन भी सुलभ हैं। सनातन हिन्दू धर्म के केन्द्र के रूप में एवं बौद्ध और जैन पंथों के सिद्धों के साथ-साथ सन्तों, योगियों व कालान्तर में शिक्षावादियों ने अपनी साधना और सिद्धि का केन्द्र वाराणसी को बनाया है। काशी में विराजमान बाबा विश्वनाथ का ज्योर्तिलिंग द्वादश ज्योर्तिलिंग में प्रमुख स्थान पर है। मध्यकाल में मुगल आक्रान्ताओं द्वारा इस पावन स्थल को भारी क्षति पहुँचायी थी। सन् 1777-78 ई0 में महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने इस मन्दिर परिसर का पुर्ननिर्माण कराया था एवं कालांतर में 19वीं सदी में महाराजा रणजीत सिंह ने इस मन्दिर पर स्वर्ण शिखर लगवाया था। लगभग 200 वर्षों के बाद भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री जो संसद में काशी का प्रतिनिधित्व करते हैं, उनके द्वारा काशी की पुरातन आत्मा को संरक्षित रखते हुए नये कलेवर में श्री काशी विश्वनाथ धाम परिसर के नवनिर्माण को वैश्विक मंच पर मनरा किया है। नवीन श्री काशी विश्वनाथ धाम परिसर उन्हीं परिकल्पनाओं का मूर्त रूप है। श्री काशी विश्वनाथ धाम का शुभ
लोकार्पण कार्यक्रम प्रधानमंत्री की कर कमलों से पूज्य संतों व धर्माचार्यों की उपस्थिति में 13 दिसम्बर, 2021 (विक्रम संवत् 2078 मागशीर्ष शुक्लपक्ष दशमी तिथि ) को होने जा रहा है। उक्त कार्यक्रम में प्रयागराज के कई संत महात्माओं महामंडलेश्वर को काशी से आमंत्रण पत्र भेजा जा रहा है। उक्त जानकारी पता करने पर सत्य नारायण दास टाइगर बाबा ने बताया प्रयागराज में कई संत महात्माओं को निमंत्रण आया है जिसमें मुख्य रुप से माधव दास उर्फ हिटलर बाबा महामंडलेश्वर महंत बलवीर गिरी महंत ओमकार गिरी रविंद्रपुरी निर्वाणी अखाड़ा सहित कई संतों को काशी विश्वनाथ कारीडोर के लोकार्पण कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी के साथ संत समाज कुछ पल बिताएगा और उनके साथ चौपाल लगाएगा।


