गंगा तट सेसंत समागम

दंतेवाड़ा में स्‍थापित मां दंतेश्‍वरी मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक

मां सती का दांत जहां गिरा उस जगह का नाम दंतेवाड़ा मंदिर

केवल लुंगी और धोती पहनकर ही कर सकते है देवी मां के दर्शन

( अनुराग शुक्ला )
दंतेवाडा (अनुराग दर्शन समाचार )। छत्‍तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में स्‍थापित मां दंतेश्‍वरी मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। मान्‍यता है कि इस स्‍थान पर मां सती का दांत गिरा था। इसलिए इस जगह का नाम दंतेवाड़ा और मंदिर का नाम दंतेश्‍वरी मंदिर पड़ा। बता दें कि देवी मां के इस मंदिर में सिले हुए वस्‍त्र पहनकर जाने की मनाही है। यहां केवल लुंगी और धोती पहनकर ही देवी मां के दर्शन किया जा सकता है। मंदिर की स्‍थापना के बारे में कहा जाता है कि एक अन्‍नम देव नाम के राजा हुए, जिन पर देवी की कृपा थी। स्‍थानीय निवासी बताते हैं कि दंतेश्‍वरी मां ने राजा को वरदान दिया कि वह जहां तक जाएंगे वहां तक उनका राज्‍य होगा, लेकिन शर्त यह है कि वह पीछे मुड़कर नहीं देखेंगे। इसके बाद राजा आगे-आगे और मां उनके पीछे चलीं। चलते-चलते राजा का साम्राज्‍य काफी फैलता गया। लेकिन एक जगह नदी को पार करते समय राजा को लगा कि मां उनके पीछे नहीं आ रही हैं तो वह मुड़ गए। इसके बाद मां वहीं रुक गई और उन्‍होंने कहा कि शर्त के मुताबिक राजा पीछे मुड़ गया है इसलिए अब वह आगे नहीं जाएंगी। अब यहीं पर विराजेंगी। तब से ही मां दंतेश्‍वरी मंदिर के पास स्थित नदी के किनारे मां के चरण चिन्‍ह मौजूद हैं। नवरात्र के दिनों में यहां दूर-दूर से भक्‍तजन आते हैं।

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