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चिकित्सकों की तनावपूर्ण जीवनशैली से कई समस्याएं : प्रो अनुज महेश्वरी

प्रयागराज ( अनुराग दर्शन समाचार ) चिकित्सकों की एक अत्यन्त तनावपूर्ण जीवन शैली होती है। जिसके परिणाम स्वरूप डाईबिटिज, हाई ब्लडप्रेशर व असामयिक निधन जैसी समस्याएं सामान्य जनता से कई गुना ज्यादा होती है। उक्त विचार रविवार को बीबीडी विश्वविद्यालय लखनऊ के मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) अनुज महेश्वरी ने ‘‘चिकित्सकों के व्यक्तिगत शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य’’ व्याख्यान में व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इससे बचने के लिए चिकित्सकों को अपनी मानसिक शान्ति के लिए अपनी दिनचर्या में से कुछ समय अवश्य निकालना चाहिए। जिसका सदुपयोग योगा, प्राणायाम, ध्यान, संगीत व अन्य किसी भी नियमित व्यायाम में करना चाहिए।

इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन के प्रांगण में आयोजित वैज्ञानिक संगोष्ठी में वक्ता के.जी.एम.सी. में फैमिली मेडिसिन के विभागाध्यक्ष डॉ. नरसिह वर्मा ने अपने व्याख्यान में चिकित्सकों में तनाव व अस्वस्थता का कारण दोषपूर्ण चिकित्सा शिक्षा प्रणाली को बताया। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज में दाखिले के साथ ही हॉस्टल व मेस की दुर्दशा, शिक्षा का असीमित व अनियमित समय, देर रात तक पढ़ाई के साथ खेल-कूद व अन्य पाठ्येत्तर गतिविधियों की कमी से ही इसकी शुरुआत हो जाती है, और वरिष्ठ शिक्षकों का अव्यावहारिक सख्त व्यवहार इसमें कई गुना और वृद्धि कर देता है। आज आवश्यकता है कि चिकित्सा विद्यालयों में प्रवेश के साथ ही चिकित्सकों को शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य का भी प्रशिक्षण दिया जाये। नये एन.एम.सी. बिल में ऐसा प्रावधान किया भी गया है किन्तु यह अभी कुछ चुनिंदा संस्थानों तक ही सीमित है,इसे प्रत्येक चिकित्सा महाविद्यालय में लागू करने की तुरन्त आवश्यकता है। इसके पूर्व हुई संगोष्ठी ‘मेडिको लीगल एस्पेक्टस एंड सीपीए इन डे टू डे क्लिनिकल प्रैक्टिस’ विषय पर थी। मुख्य वक्ता मुम्बई की प्रख्यात स्त्री रोग विशेषज्ञ व मेडिको लीगल एक्सपर्ट डॉ. विद्या शेट्टी ने अपने वक्तव्य में डॉक्टर व मरीज के सौहार्द सम्बंधों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। सलाह दी कि डॉक्टर, हॉस्पिटल स्टॉफ व रोगी और उनके परिजनों के बीच संवाद की निरंतरता बनाये रखनी चाहिए। संगोष्ठी में चेयरपर्सन सी.एम.ओ.प्रयागराज डॉ.नानक शरन, ए.सी.एम.ओ. डॉ.सत्येन राय, डॉ.अभिलाषा चतुर्वेदी, डॉ.रोहित गुप्ता, डॉ.संजीव यादव, डॉ.मनीषा गुप्ता, डॉ.अनुराग वर्मा थे। अध्यक्षता एएमए अध्यक्ष डॉ.सुजीत सिंह ने एवं संचालन सचिव डॉ.आशुतोष गुप्ता और वैज्ञानिक सचिव डॉ.अनुभा श्रीवास्तव ने किया तथा भविष्य में ऐसी ज्ञानवर्धक संगोष्ठियां आयोजन कराने का आश्वासन दिया और अन्त में वक्ताओं और श्रोताओं को धन्यवाद दिया।

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