भय प्रकट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी..

भव्यता के साथ मना श्री रामलला का जन्मोत्सव
अयोध्या (अनुराग दर्शन समाचार ) रविवार को श्री रामलला का जन्मोत्सव ठीक 11ः30 बजे प्रारम्भ हुआ तथा 12 बजे ‘‘भय प्रकट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी। हर्षित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप विचारी।।‘‘ के उनके जन्मोत्सव के छन्द को आचार्यो, संत महात्माओं, अधिकारियों व श्रद्वालुओं ं द्वारा सस्वर गाया गया तथा उनके 108 नाम सहित अन्य श्रीराम चन्द्र जी के एवं दशरथ नन्दन के छन्दों को गाया गया। पूरे अयोध्या में उल्लास के साथ वातावरण में अबीर रंग उड़ाते हुये लगभग अयोध्या के 175 मंदिरों में एक समय भगवान राम का जन्मोत्सव मनाया गया। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार श्रीरामलला विराजमान मंदिर का तथा श्री कनक बिहारी मंदिर का दूरदर्शन द्वारा एवं आकाशवाणी द्वारा सजीव प्रसारण किया गया। भगवान के भोग लगाये गये हुये प्रसाद, चरणामृत एवं फल आदि वितरित किये गये, जिसमें अयोध्या की धरती पर लाखों श्रद्वालुओं ने प्रसाद के साथ साथ भंडारे का भी आनन्द लिया।
कार्यक्रम स्थल पर उपस्थित होकर मण्डलायुक्त नवदीप रिणवा, पुलिस महानिरीक्षक अयोध्या रेंज कविन्द्र प्रताप सिंह, जिलाधिकारी नितीश कुमार, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शैलेश कुमार पांडेय आदि अधिकारियों ने अपने परिवार के साथ इस जन्मोत्सव के भव्य आयोजन का अवलोकन किया। इस अवसर पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के वरिष्ठ सदस्य संत जिनेन्द्र दास अन्य सदस्य अनिल मिश्र, विश्व हिन्दू परिषद के वरिष्ठ दिनेश जी, मुख्य पुजारी सत्येन्द्र दास सहित अन्य पुजारी गण, श्रीराम जन्मभूमि कार्यालय के गोपाल जी, राजकुमार, रामशंकर, एलएनटी के प्रमुख विनोद मेहता, उपनिदेशक सूचना डा. मुरलीधर सिंह, एलएनटी के वरिष्ठ अभियन्ता एवं पदाधिकारी आदि उपस्थित थे। इसके अलावा श्रीराम जन्मभूमि के वरिष्ठ अधिकारी पंकज, निरीक्षक/आरएमओ अर्जुन देव, अपर जिलाधिकारी नगर सलिल कुमार पटेल, पुलिस अधीक्षक नगर विजयपाल सिंह, क्षेत्राधिकारी अरविन्द चतुर्वेदी, मुख्य अग्निशमन अधिकारी राजकुमार राय, एसडीएम सदर रामकुमार शुक्ला, सच्चिदानन्द सहित अनेकों वरिष्ठ अधिकारी एवं हजारों की संख्या में श्रद्वालु, गणमान्य नागरिक बलराम दास, जयराम दास, गोविन्द दास, श्रवण दास, अनिल दास, विश्व हिन्दू परिषद एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी व सांसद लल्लू सिंह, विधायक वेद प्रकाश गुप्ता सहित अनेक वैद्विक एवं कर्मकांडों के विद्वान उपस्थित थे।



