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नैतिक बौद्ध होने का प्रमुख प्रतीक है-डॉ. शाक्य

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार ) ।आज बुद्ध पूर्णिमा के शुभ अवसर, बौध कम्यून (अंतर्राष्ट्रीय) ने पवित्र संगम के तट पर स्थित समरत हर्षवर्धन बुद्ध विहार में ‘टिपवानी बुद्ध मोहोत्सव’ मनाया । उत्सव की शुरुआत ‘बुद्ध वंदना, त्रि-शरण, पंचशील, कर्णियामेय्या – सुत्त और पाटिचा-समुपदा’ के करामाती के साथ हुई और सभी के बीच एक सौभाग्य और समानता की प्रार्थना की । उत्सव के दौरान, संगठन के संस्थापक और प्रबंध निदेशक, डॉ जी एस शाक्य ने सभी को दिल से बधाई दी और सर अल्बर्ट आइंस्टीन के बयान को फिर से उद्धृत किया कि, “एकमात्र धर्म जो विज्ञान और अनुसंधान के व्यावहारिक आधार पर खड़ा है, वह बौद्ध धर्म है” । शाक्य ने यह भी कहा कि “इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपके पास कितनी संपत्ति है, केवल एक चीज जो अंत में मायने रखती है वह है आपका आचरण क्योंकि यह हमेशा के लिए रहता है । यह उत्सव पूरे दिन चलता रहा, विभिन्न हिस्सों से आए भक्तों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और भिक्खू – संघ से आशीर्वाद लिया।

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