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जमीन से जुड़े विवाद जल्द होंगे खत्म, घरौनी के लिए सर्वे शुरू

प्रयागराज ( अनुराग दर्शन समाचार )। उत्तर प्रदेश में इन दिनों घरौनी काफी चर्चा में है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि बरसों से एक स्थान पर रह रहे ग्रामीणों को उनकी जमीन का मालिकाना हक मिलेगा और कोई दूसरा इस पर अवैध कब्जा नहीं कर पाएगा। इस घरौनी के मिलने के बाद किसान इसे गिरवी रखकर बैंक से कर्ज भी ले सकेंगे। इसके लिए जनपद में सर्वे कार्य शुरू है। दरअसल, यूपी में योगी आदित्यनाथ सरकार स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण इलाकों में किसानों को उनकी जमीन का मालिकाना हक प्रदान कर रही है। इसके तहत दिए जाने वाला ग्रामीण आवासीय अभिलेख जिसे घरौनी कहा गया है, का डिजिटल वितरण किया जा रहा है। जमीन से जुड़े विवादों को खत्म करने के लिए प्रदेश के गांवों में स्वामित्व योजना लागू करने के लिए राजस्व विभाग ने इस दिशा में काम शुरू कर दिया है। इन गांवों के आबादी क्षेत्र की सम्पत्तियों का सर्वे आफ इंडिया के माध्यम से ड्रोन से हवाई सर्वेक्षण कराया जा रहा है। मुख्य राजस्व अधिकारी हरी शंकर ने बुधवार को भेंट के दौरान बताया कि गत 08 मार्च से सर्वे का कार्य जारी है, जिसमें प्रथम चरण का सर्वे हो रहा है और द्वितीय चरण में कार्य पूर्ण हो जायेगा। उन्होंने बताया कि प्रयागराज में कुल आठ तहसील हैं। जिसमें बारा तहसील में कुल 152 गांव, कोरांव में 136 गांव, हंडिया में 288, मेजा 203, फूलपुर 346, करछना 131, सदर 48 एवं सोरांव में 365 यानि कुल 1669 गांव सर्वे योग्य पाये गये हैं। उन्होंने बताया कि अभी हंडिया में एक, मेजा में दो, सदर में एक यानि कुल चार ड्रोन कार्यरत हैं और सर्वे कार्य चल रहा है। इस योजना में ग्रामीण क्षेत्र का सर्वे कराने के बाद आवासीय अभिलेख/घरौनियां दी जाती हैं। जिसके अंतर्गत प्रयागराज में भी योजना के तहत पहले चरण में ड्रोन सर्वेक्षण का काम कराया जा रहा है। बता दें कि, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अनुसार स्वामित्व योजना ग्राम्य सशक्तिकरण की दिशा में बड़ी क्रांति है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि घरौनी मात्र भूमि का मालिकाना हक दिलाने वाला सरकारी कागज नहीं, बल्कि यह गांव के लोगों का आत्मविश्वास बढ़ाने, आत्मसम्मान का बोध कराने और आत्मनिर्भरता की राह दिखाने का माध्यम है। स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीणों को अपने ग्राम के आबादी क्षेत्र में स्थित अपनी सम्पत्तियों के प्रमाणित दस्तावेज प्राप्त हो रहे हैं।

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