अज़ाखाना अमजद अली नक़वी से निकला जुलूसे अज़ा
प्रयागराज। करैली लेबर चौराहा स्थित अज़ाखाना अमजद अली नक़वी से हज़रत इमाम हुसैन के वफादार घोड़े ज़ुलजनाह, इमाम हुसैन का ताबूत सूती चादर से ढ़का और चमेली व गुलाब के फूलों से सजा कर निकाला गया।
साथ मे हज़रत अब्बास का अलम भी शामिल रहा जिस पर अक़िदतमन्द फूल माला चढ़ा कर मन्नत व मुरादें मांगते रहे।जुलूस से पूर्व शहनशाह हुसैन सोनवी ने ग़मगीन मर्सिया पढ़ा।
मौलाना डा०सै०अब्बास रज़ा ने अपनी तक़रीर मे करबला के शहीदों का ज़िक्र किया। ताहिर अब्बास के संचालन मे एक एक अन्जुमनों ने क्रमवार स्टेज पर पहोंच कर नौहा और मातम के द्वारा करबला के शहीदों को खेराजे अक़िदत पेश की।इमामबाड़े से निकले जुलूसे अज़ा मे अन्जुमन शब्बीरिया रानी मण्डी,अन्जुमन नक़वीया दरियाबाद,अन्जुमन मज़लूमिया रानी मण्डी ने नौहा और मातम का नजराना पेश करते हुए ग़म का इज़हार किया।
अन्त मे बख्शी बाज़ार की ख्याती प्राप्त अन्जुमन ग़ुन्चा ए क़ासिमया के नौहाख्वान शादाब ज़मन,अस्करी अब्बास,शबीह अब्बास,एजाज़ नक़वी,ज़हीर अब्बास,कामरान रिज़वी,यासिर ज़ैदी,अली रज़ा रिज़वी,शबीह रिज़वी,अब्बास नक़वी,अज़ीम,हैदर आदि ने शायर तालिब इलाहाबादी व ज़मीर भोपतपूरी का लिखा ग़मगीन नौहा पढ़ा तो हर ओर से आहो बूका की सदा गुंजने लगी।
जुलूस देर रात गशत करते हुए पूनःअज़ाखाना अमजद अली पहोंच कर सम्पन्न हुआ।जहाँ खवातीनों ने भी नौहा और मातम कर जनाबे सय्यदा और जनाबे ज़ैनब को पुरसा दिया।जुलूस खत्म होने पर फैज़ अब्बास नक़वी,हुसैन अब्बास नक़वी,अब्बास हैदर नक़वी की ओर से लंगर भी हुआ जिसमे अज़ादारों को इमाम हुसैन की नज़्र कराकर खिचड़ा खिलाया गया इस मौक़े पर मिर्ज़ा अज़ादार हुसैन, सै०मो०अस्करी, रिज़वान जव्वादी, मौलाना सग़ीर हसन खाँ ,सैफ अब्बास,फैज़ अब्बास,असग़र अली ,रज़ा हैदर बाशू, शैदा, मो०मेंहदी, मो०अब्बास, आसिफ रिज़वी सहित सैकड़ो लोग शामिल रहे।
वहीं इसी सिलसिले की दो अन्य मजलिसें दरियाबाद के बारादरी मे पार्षद एहतेशाम रिज़वी की मर्सिया ख्वानी से और करैली के रहमतनगर मे हुसैन रज़ा द्वारा आयोजित सालाना मजलिस को मौलाना रज़ी हैदर ने खिताब किया।अन्जुमन ग़ुन्चा ए क़ासिमया ने नौहा और मातम का नज़राना पेश किया।



