कर्म के फल को छोड़ो, उस कर्म के रस का आनंद लो- मोरारी बापू
प्रयागराज 5 मार्च (अनुराग शुक्ला) । अरैल में चल रही राम कथा “मानस अक्षयवट” के छठे दिन गुरुवार को कथा मर्मज्ञ मोरारीबापू ने नारद भक्ति सूत्र के छह लक्षण बताते हुए अक्षयवट की महिमा बताई।
बापू ने कहा कि अगर आपके दिल में प्रेम है तो 24 घंटे आप अक्षयवट की छाया में ही है। आप निरन्तर अक्षयवट छाव लिए हुए हो और अगर आपके दिल में द्वेष, ईष्या है तो आप अक्षयवट की छांव में होकर भी अक्षयवट से कोसों दूर हो।

संत कृपा सनातन संस्थान, नाथद्वारा की ओर से आयोजित राम कथा में नारद भक्त सूत्र का दूसरा लक्षण बताते हुए बापू कहते हैं कि जहां परमात्मा पर भरोसा है, दृढ़ विश्वास है, जो भरोसा कभी छूटे नहीं, वह अक्षयवट है। तीसरा लक्षण बताते हुए बापू ने कहा कि राम कथा सुनते हुए यह महसूस हो जाए कि यहां विश्राम है, शांति है, तो यहीं अक्षयवट है।
चौथे लक्षण के रूप में बापू कहते हैं कि किसी वस्तु का सोच समझकर निर्णय करो और उस पर अडिग रहो, यह अडिगता ही अक्षयवट है। बापू कहते हैं कि हमारे भोजन का पहला हिस्सा किसी जरूरतमंद, दूसरे के लिए निकालो, यह त्याग, वैराग्य ही अक्षयवट है, यहीं पांचवा लक्षण है। नारद भक्ति सूत्र के अंतिम छठे लक्षण के भावार्थ की व्याख्या करते हुए बापू ने कहा कि फल की इच्छा किए बिना जो कर्म करते जाए, वहीं अक्षयवट है।
बापू ने कहा कि जो गुण रहित, कामना रहित और अविच्छिन्न है, वहीं अक्षयवट है। जिसके एक सूक्ष्म फल से कई वट वृक्ष खड़े हो सकते हैं। बापू कहते हैं कि सुबह स्नान करके वट की पूजा करो तो वो भी अक्षयवट है। अक्षयवट को कितना कह पाऊंगा, जितना भी कहूंगा, कई गुणा छूट जाएगा।
कोई सिद्धांत नहीं बनाओ, अच्छे स्वभावी बनों
“मानस अक्षयवट” कथा के दौरान एक सवाल के जवाब में बापू कहते हैं कि मेरा कोई सिद्धांत नहीं है, मेरा स्वभाव है। सिद्धांत पंडितों का होता है, मेरा तो स्वभाव है। साधु का स्वभाव होता है। सिद्धांत भी स्वभाव से बनते हैं। बापू कहते हैं कि मैं सिद्धांतों का आदर करता हूँ, गलत नहीं है, लेकिन जिसने भी सिद्धांत बनाएं वह उसका स्वभाव था। मेरा कोई भी सिद्धांत नहीं है, क्योंकि सिद्धांत बांधता है, स्वभाव मुक्त करता है। सिद्धांत बदल जाता है, स्वभाव अखंड है। बापू युवाओं को आव्हान करते हुए कहते हैं कि अच्छे स्वभाव बनाओं, अच्छे स्वभाव में जिओ, किसका डर है, जो रास नहीं आए वो संग छोड़ दो।

बापू कहते हैं कि दुनिया में मौज में रहो, आनंद में रहो, लेकिन त्याग से रहो। आप अच्छा खाओ लेकिन बाकी को भी खिलाओ। युवाओं को आव्हान करते हुए बापू ने कहा कि कोई भी बड़ी विपत्ति आए तो धैर्य मत खोना। परमात्मा हर व्यक्ति को उतनी ही विपत्ति देता है, जितनी वह सहन कर पाता है। कमजोर को विपत्ति देना हिंसा है और सामर्थ्यों को विपत्ति देना, सामर्थ्य का स्वागत है।
वट वृक्ष में होती हैं कई औषधियां, दुनिया के हर रोग का इलाज यहां
“मानस अक्षयवट” कथा के दौरान मोरारीबापू ने कहा कि वट के वृक्ष के फल से कई औषधियां बनती है। यह कई रोगों का इलाज है। हमारे शास्त्रों में भी वृक्ष औषधियों से भरपूर है। तुलसी का पौधा औषधमय है, वह ताज़ा और निरोगी रखता है। बापू ने कहा कि अब तो विज्ञान ने भी मान लिया है कि पीपल का वृक्ष ज्यादा ऑक्सिजन छोड़ता है और ज्यादा कार्बन डाईऑक्साइड ग्रहण करता है, बापू कहते हैं कि कोई वृक्ष ऐसा नहीं है जिसमें औषधि नहीं हो, बस खोज का अभाव है।
बापू कहते हैं कि दुनिया में कोई भी बीमारी आए, भारत में उसका इलाज है। और अगर जब कोई औषधि काम न करें तो गोस्वामी तुलसीदास जी ने राम बाण इलाज दिया है, रामचरितमानस। राम के नाम का जाप करो, हरिनाम सबसे बड़ी औषधि है।
जो शांति प्रयाग में है वह प्रयागराज ही है –
“मानस अक्षयवट” में मोरारीबापू ने कहा कि बहुत कथाएं कही है, लेकिन कथा को सुनने की शांति जो यहां है, वह कहीं और नहीं मिली। यह सिर्फ प्रयाग के लोग ही कर सकते है। प्रयाग के वासियों ने इस धरा का मान रखा है, जहां भारद्वाज जैसे ऋषि हुए जो तीर्थराज है। कथा में शांत खड़े यह लोग और यह शांति प्रयागराज की शान है। इतनी शांति सिर्फ प्रयाग वाले ही रख सकते हैं, बापू कहते हैं कि गीतावली में प्रेम ही अक्षयवट है, यहीं प्रयाग है।

प्रेम का अक्षयवट नहीं टूटता है। विश्वास रूपी डाल, प्रेम के अक्षयवट में कभी नहीं टूटती है। बापू ने कहा कि यह प्रेम सभा मेरा मयखाना है, जहां सियाराम भक्ति की रसधारा निशुल्क पिलाई जाती है और यहां सबका स्वागत है। मेरी व्यासपीठ मुक्त है, मेरे पास आने वाला भी मुक्त है।
आत्मा ही शिव, व्यक्ति के कर्म ही परिक्रमा, वाणी ही स्मृति
कथा के दौरान मोरारीबापू ने कहा कि हर आत्मा में शिव है, व्यक्ति सो रहा है तब उसकी समाधि है, अगर काम पर जा रहा है तो वह उसकी परिक्रमा है। व्यक्ति की बुद्धि ही शिव-पार्वती है। मानव की भाषा ही शिव की स्मृति है और जो भी कर रहा हूँ वहीं शिव को समर्पित है। शिव तो भोला है, वह सुसंस्कृत और व्याकरण नहीं समझता है। बापू ने एक भ्रांति रूपी सवाल के जवाब में कहा कि शिव को मानते है तो भले शिवलिंग को घर में रखो, घट में रखो।
महिलाएं भी ओम नमः शिवायः बोल सकती है। बापू तुलसीदास जी का जिक्र करते हुए कहते हैं कि प्रयागराज सकल कामना पूरी करते हैं। भगवान शंकर के भक्ति हृदय पर अक्षयवट विराजमान है। जो प्रेम और स्नेह है, वही अक्षयवट है। परमात्मा के चरण रूपी तीर्थराज पर अक्षयवट प्रेम है।
स्वामी शरणानंद के तीन सूत्रों पर की जिज्ञासाएं दूर
राम कथा के दौरान मोरारीबापू ने एक श्रोता के पत्र के संदर्भ में स्वामी शरणानंद के तीन सूत्र का भावार्थ समझाते जिज्ञासा दूर की। बापू ने कहा कि स्वामीजी ने तीन सूत्र विवेक विरुद्ध कर्म, विवेक मुक्त विश्वास और विवेक मुक्त भक्ति नहीं करने को कहा है। अर्थात बिना विवेक के कोई कर्म नहीं करना चाहिए, बिना विवेक किसी पर विश्वास और बिना विवेक सत्संग नहीं करना चाहिए।
हालांकि बापू के कहा कि विश्वास वाले सूत्र में मेरा मानना अलग है, में सब पर विश्वास करता हूँ, मुझे सभी स्वीकार्य है। इसके बाद बापू ने कहा कि गांधीजी की तरह मेरे पास भी मेरा प्राणी संग्रहालय है, मेरे श्रोताओं का संग्रहालय, जो कि मुझे अतिप्रिय है। बापू कहते हैं कि राम भी सभी को अतिप्रिय है, इस धरा पर शायद ही कोई हो जिसे राम प्रिय न हो। एक ही परम तत्व है जो सभी को सभी प्रिय लगते हैं, परमात्मा सभी को प्रिय लगते हैं।
मेरे पास कोई गुरु मंत्र नहीं, मानस सबसे बड़ा गुरु मंत्र
राम कथा के दौरान मोरारीबापू ने कहा कि मेरे पास कोई गुरु मंत्र नहीं है। श्रोता मुझसे गुरु मंत्र मांगने आते हैं, मैं किसी को गुरु मंत्र नहीं देता, मैं मोहब्बत देता हूँ, क्योंकि में इतना बड़ा नहीं। बापू कहते हैं कि मंत्र का एक अर्थ विचार भी है, अगर आपको व्यासपीठ से कोई अच्छा विचार मिल जाए, तो उसे ही मंत्र मानते हुए, उस पर जीवन यापन करे। तुलसीदासजी की रामचरितमानस सबसे बड़ा मंत्र है, मानस पढ़ो, राम के नाम का जप करो। बापू कहते हैं कि व्यक्ति को कर्मफल की ईच्छा नहीं करते हुए कर्म रस का आनंद लेना चाहिए। कर्म के फल को छोड़ो, उस कर्म के रस का आनंद लो।
सुनाई राम कथा, जयसियाराम के लगे जयकारे
“मानस अक्षयवट” के छठे दिन मोरारीबापू ने राम कथा के आगे का प्रसंग सुनाते हुए भील कन्या और माँ जानकी के संवाद के बारे में विस्तार से व्याख्या की। हज़ारों की तादाद में उमड़ी भीड़ बापू के मुख से निकलने वाली चौपाइयों और कथा के सार को टकटकी लगाए सुनती रही। बापू ने राम भक्ति रस का गुणगान किया तो पांडाल राम के जयकारों से गूंज उठा और लोग हाथ उठाएं नृत्य करने लगे और राम भक्ति रस में डूबे नज़र आए।
कोरोना वायरस के लिए बचाव के उपाय अपनाने को कहा
कथा के दौरान मोरारीबापू ने श्रोताओं को कोरोना वायरस से बचाव के उपाय अपनाने के लिए भी कहा। बापू ने कहा कि आप वे सभी उपाय करें, जो इस बीमारी से बचने के लिए बताएं जा रहे हैं।
यह रहे मौजूद
“मानस अक्षयवट” कथा अवसर पर कथा के मुख्य आयोजक मदन पालीवाल, रविन्द्र जोशी, रूपेश व्यास, विष्णु कान्त व्यास ,मंत्रराज पालीवाल, सतुआ बाबा सहित बड़ी संख्या में संत कृपा सनातन संस्थान से स्वयंसेवक व श्रद्धालु मौजूद थे।
व्यासपीठ के समक्ष निःशुल्क सामूहिक विवाह कल
“मानस अक्षयवट” रामकथा के तहत संत कृपा सनातन संसथान द्वारा मोरारीबापू बापू के आव्हान पर 7 मार्च शनिवार को व्यासपीठ के समक्ष सामुहिक विवाह सम्पन होगा। दूल्हा-दुल्हन मोरारीबापू के समक्ष व्यासपीठ पर फेरे लेते हुए एक दूसरे को वरमाला पहनाएंगे और रामचरितमानस को साक्षी मानते हुए अपने दाम्पत्य जीवन की शुरुआत करेंगे। सामुहिक विवाह के लिए अब तक 25 से अधिक जोड़ों का पंजीयन हो चुका है। सभी जोड़ों के लिए पौशाक ,उपहार से लेकर वरमाला और शादी में आने वाले अतिथियों के भोजन का समस्त खर्च संत कृपा सनातन संस्थान वहन करेगा।
विवाह के लिए रजिस्ट्रेशन रामकथा कार्यालय ,रामकथा स्थल अरैल घाट पर शुक्रवार दोपहर तक किया जायेगा
बांसुरी वादन प्रस्तुति आज
राम कथा के सांस्कृतिक कार्यक्रमों के तहत शुक्रवार शाम को साढ़े पांच बजे से प्रसिद्ध बांसुरी वादक बलजिंदर सिंह बल्लू बांसुरी वादन की प्रस्तुति देंगे। इंदौर के रहने वाले बल्लू के साथ उनकी टीम भी अपनी भूमिका निभाएगी।


