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दूध के काले कारोबार पर कब होगी जांच पड़ताल

विभागीय अफसरों पर लग रहा उदासीनता का आरोप

कोराव,प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)
काफी समय से इलाके में मिलावटी दूध का कारोबार बेख़ौफ़ चल रहा है और जिम्मेदार महकमे के अफसर पूरी तरह से उदासीन बने दिख रहे है कस्बा व ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासन की नाक के नीचे सिंथेटिक दूध बनाने का अवैध कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है इस गोरखधन्धे में लिप्त लोग अपने मोटे मुनाफे के लिए भोले-भाले लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं ये लोगो को दूध के नाम पर रसायन पिला रहे है इस विधि से तैयार सैकड़ों लीटर दूध तैयार करके इसे नगर के अलावा दूध डेयरी मे सप्लाई की जा रही है इस दूध में रसायन मिले होने के कारण यह दूध गाढ़ा होता है इसकी जांच करने पर इसमें तैलीय पदार्थ अधिक होने के कारण इसमे फैट की मात्रा अधिक होने से इसके दाम भी अधिक वसूल रहे हैं दूध डेयरी में भी इस नकली दूध की पहचान करना मुश्किल हो रहा है ग्रामीण क्षेत्रों में लोंगों द्वारा सिन्थेटिक दूध हजारों लीटर तैयार कर गाय या भैस के दूध में इसको मिलाकर सीधे दूध डेयरी में पहुंचाया जा रहा हैइसके साथ ही कस्बे के अधिकांश होटलों में नकली पनीर व मावा भी लोगों को खिलाया जा रहा है इस नकली मावे से बनी मिठाइयां बच्चों व बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर गलत प्रभाव डाल रही है आरोप है कि : पाउडर व रसायन को मिक्सी द्वारा पेस्ट जैसा पदार्थ तैयार करते हैइस 5 लीटर पेस्ट में पानी मिलाने से 25 लीटर दूध तैयार हो जाता है इस विधि से प्रतिदिन हजारो लीटर दूध तैयार करके इसे शहर के अलावा दूध डेयरी में आपूर्ति किया जाता है इस नकली दूध के गाढ़ा होने से जांच करने पर इसमें वसा की मात्रा अधिक पाई जाती है।इतना सब होने के बावजूद भी जिम्मेदार अफसर पूरी तरह से उदासीन दिख रहे है ।सरकारी आंकड़ों में प्रतिदिन दूध के उत्पादन एवम खपत में भारी अंतर दिख रहा है तो अब यहां सवाल यह पैदा होता है कि आखिर बिना उत्पादन वाला दूध कहा से आ रहा है । सबसे हैरत की बात यह है कि मामले में जांच पड़ताल करने वाले अफसरों पर ही काले कारोबारियों से मिलीभगत एवम उनसे अवैध वसूली का आरोप लोगो द्वारा लगाया जा रहा है ।स्थानीय लोगो ने जिलाधिकारी का ध्यान आकृष्ट किया है ।बहुत से पशुपालक अपने पशुओं का दूध निकालने से पहले उन्हें ऑक्सिटोसीन का इंजेक्शनलगा देते हैं इससे पशु को नशा हो जाता है और उसके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है दूसरी तरफ, इंजेक्शन लगे पशु का दूध जब कोई सेवन करता है तो उसके स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है ऑक्सिटोसीन लगे पशु का दूध पीने से लोगों की मानसिक स्थिति पर बुरा असर पड़ता है लोगों के कई अन्य बीमारियां भी हो सकती है इंजेक्शन को बेचना और इसे पशुओं को लगाना दोनों गैर कानूनी है सरकार ने पहले से ही इस इंजेक्शन की बिक्री व पशु को लगाने पर पाबंदी लगाई हुई है जो दुकानदार यह इंजेक्शन बेचता व कोई पशुपालक पशुओं को इंजेक्शन लगाता पकड़ा गया तो उसके खिलाफ प्रशासन को नियमानुसार कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए कुछ पशुपालक अपने निजी स्वार्थों के लिए दूध की मात्रा बढ़़ाने के लिए इस इंजेक्शन का प्रयोग करते हैं।

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