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आजादी के सात दशक बीतने के बाद भी रास्ते के लिए तरस रहा बरनपुर गाँव

कागजो पर खर्च हो रहा गावो के विकास के लिए आने वाला धन

कोराव,प्रयागराज,(अनुराग दर्शन समाचार)। गावो में प्रधानों एवम अन्य जिम्मेदारों की मनमानी के चलते आज भी तमाम गावो के लोग सार्वजनिक रास्तों के लिए परेशानी का सामना कर रहे है । कुछ प्रधानों के विद्वेष बस भी गांवों का विकास नहीं हो पा रहा है। जिससे गांवों में आज भी लोग भीषण कीचड़ में चलने को मजबूर हैं। ग्राम पंचायत बरनपुर में पूरे गांव का आम रास्ता आजादी के कई दशक बीत जाने के बाद भी नहीं बन सका। जिससे ग्रामीण आज भी गुठने भर कीचड़ में चलने को मजबूर हैं। ग्राम वासियों का कहना है कि आखिरकार जब योगी सरकार में भी कीचड़ से निजात नहीं मिली तो अब किस सरकार में निजात मिल पायेगी। आजादी के सात दशक के समय मे कई प्रधान हुए गांव में लाखों रुपये धन प्रत्येक वर्ष खर्च किया जा रहा है किंतु सार्वजनिक आम रास्ते को बनवाने की जहमत किसी ग्राम प्रधान व अधिकारी ने नहीं उठाई। जिससे ग्रामीणों में बेहद आक्रोश व्याप्त है। ग्राम पंचायत बरनपुर में गांव तक तो पीडब्ल्यूडी की सड़क लगी हुई है। किंतु गोपाल तालाब से लेकर श्यामधर नाई के घर तक तकरीबन 700 मीटर दूरी तक न तो गिट्टी मोरंग किया गया है न ही खड़ंजा लगाया गया है जिससे उक्त रास्ता कीचड़ से सराबोर है साइकिल सवार हों या बाइक सवार अथवा पैदल चलना दूभर है। ऐसे में ग्राम सचिव ग्राम विकास अधिकारी भी मनमानी पर आमादा रहते हैं। कौन सा विकास कार्य पहले होना है या कौन सा विकास कार्य पहले कराया जाना चाहिए, इससे उनका कोई भी वास्ता सरोकार नहीं है। मनमाने तरीके से ग्राम प्रधान की मिलीभगत से सरकारी धन का धनादोहन करने में जुटे रहते हैं। मनमानी का एक ज्वलंत उदाहरण यह है कि बोरिंग टेक्नीशियन के परीक्षण के बाद खंड विकास अधिकारी कोरांव रमाशंकर सिंह को हैण्डपम्प को रिबोर कराये जाने हेतु रिपोर्ट सौंपी गई किंतु ग्राम प्रधान की मनमानी के चलते रिबोर नहीं हो सका। जिससे कई परिवार पानी के लिए भी तरस रहे हैं। इसी प्रकार पूरा मुनई, जादीपुर समेत दर्जनों गांवों में इस बारिश के मौसम में ग्रामीण भीषण कीचड़ में चलने को मजबूर है ।

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