बीईओ के चयन में अधिकारियों का घालमेल उजागर
अब तक नहीं बनी बीईओ पदनाम की सेवा नियमावली
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) के चयन में बेसिक शिक्षा के अधिकारियों का घालमेल सामने आया है। चयन के लिए भाजपा शासन की नियमावली और बसपा काल के शासनादेश को आधार बनाया गया है। नियमावली में खंड शिक्षा अधिकारी पदनाम का जिक्र तक नहीं है, वहीं शासनादेश में जो पद शिक्षा संवर्ग ख का है उसका विज्ञापन शिक्षा संवर्ग ग के तहत हुआ है। मतलब साफ है कि अधिकारी दोनों से सहूलियत के हिसाब से बिंदु चिन्हित करके चयन हो रहा है। यह नौबत इसलिए आई क्योंकि बीईओ पदनाम की सेवा नियमावली ही नहीं बन सकी है।
उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा परिषद के 1.59 लाख प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों की निगरानी करने का जिम्मा खंड शिक्षा अधिकारियों पर है। 824 विकासखंड मुख्यालयों पर 714 खंड शिक्षा अधिकारी कार्यरत हैं। इनके स्वीकृत पद 1031 हैं। बीईओ की कमी को पूरा करने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग 309 नए बीईओ का चयन उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) से करा रहा है। इसकी प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा हो चुकी है। करीब 5.28 लाख अभ्यर्थियों ने इस पर चयन के लिए आवेदन किया था और मुख्य परीक्षा के लिए 4591 सफल हुए थे।
यह चयन विसंगतियों से भरपूर है। इसकी जानकारी आवेदकों को नहीं है लेकिन, बीईओ संवर्ग खासा नाराज है, क्योंकि आयोग ने इसका विज्ञापन शिक्षा सेवा समूह ग के तहत जारी किया है। कार्मिक विभाग के आदेशानुसार 4600 ग्रेड पे से 5400 ग्रेड पे के अधिकारी समूह ख के तहत आते हैं। छठें व सातवें दोनों वेतन आयोग में इसका स्पष्ट उल्लेख है, फिर भी आयोग ने 4800 ग्रेड पे वाले बीईओ का समूह ग दर्ज किया है।
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अभी प्रारंभिक स्तर पर है नियमावली
प्रयागराज। खंड शिक्षा अधिकारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रमेंद्र कुमार शुक्ल ने बताया कि प्रतिष्ठित यूपीपीएससी उन्हीं पदों का चयन कराता है, जिनकी नियमावली हो या फिर सरकार अंडर टेकिंग दे कि नियमावली जल्द बना देंगे। बीईओ में बिना नियमावली चयन हो रहा है और नियमों का उल्लंघन करके समूह ग का पद लिखा गया है। उन्होंने विज्ञापन संशोधित करने की मांग की। इस मामले में अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा रेणुका कुमार ने कहा कि इन दिनों बेसिक व माध्यमिक का संवर्ग तय हो रहा है। बीईओ की नियमावली अभी प्रारंभिक स्तर पर ही है। इसलिए नए पदों का चयन पुरानी नियमावली से कराया जा रहा है।
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यह है पूरा मामला
प्रयागराज। 18 जुलाई 1992 की नियमावली प्रति उप विद्यालय निरीक्षक (एसडीआई) अराजपत्रित के लिए बनी थी। इसके बाद 14 जुलाई 2011 को एसडीआई व डीआई के पदों को मर्ज करके राजपत्रित खंड शिक्षा अधिकारी बना। उप्र लोकसेवा आयोग के विज्ञापन में शासनादेश का राजपत्रित और नियमावली के समूह ग का उल्लेख है। जब पुनर्गठन के शासनादेश से दोनों पद खत्म करके नया पद बना तो छोटे पद की नियमावली कैसे मान्य हुई? जब विज्ञापन में बीईओ का वेतनमान 4800 ग्रेड पे दर्ज है और यह पद समूह ख के तहत आता है तो समूह ग कैसे मान्य?



