फर्जी नियुक्ति के फ्राड में शामिल प्राचार्य और प्रबन्धक पर लगाया आरोप

डा. सत्यवान की फर्जी नियुक्ति विषयक प्राचार्य द्वारा प्रदत्त जबाब का खण्डन आयोग को भेजा
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। इलाहाबाद केन्द्रीय विश्वविद्यालय से सम्बद्ध सीएमपी डिग्री कालेज के विधि विभाग में प्राचार्य तथा प्रबन्धक की आपसी मिलीभगत से अनुसूचित जनजाति के पद पर जिला गोरखपुर, तहसील बांसगांव, ग्रामसभा नेवरा के निवासी डा. सत्यवान कुमार नायक जो सामान्य वर्ग से ताल्लुक रखते है की असि. प्रोफेसर पद पर फर्जी नियुक्ति से संबंधित प्राचार्य द्वारा अनुसूचित जनजाति आयोग को प्रदत्त किये गये जबाब का खण्डन पूर्वांचल दलित अधिकार मंच (पदम) के संस्थापक उच्च न्यायालय के अधिवक्ता रामबृज गौतम ने आयोग के सहायक निदेशक एसपी मीणा को मय स्पीड पोस्ट भेजा।
पदम संस्थापक रामबृज गौतम ने प्राचार्य सीएमपी डिग्री कालेज द्वारा आयोग को भेजे गये जबाब का खण्डन भेजकर बताया कि एक ओर जहां विज्ञापन के अनुसार डा. सत्यवान को नियुक्ति के समय निर्धारित प्रारूप में अधिकतम छः माह पुराना मूल अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य था अर्थात उसके बिना नियुक्ति नहीं होनी चाहिये थी और प्राचार्य द्वारा आयोग को प्रदत्त उत्तर से प्रमाणित है कि डा. सत्यवान कुमार नायक ने निर्धारित प्रारूप का बैध जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत नही किया था तो फिर डा. सत्यवान की नियुक्ति क्यों की गयी? वहीं दूसरी ओर प्राचार्य ने यह भी माना है कि डा. सत्यवान ने 2008 का हाथ से बने उस फर्जी जाति प्रमाण पत्र को लगाया था जो जिलाधिकारी गोरखपुर द्वारा 2014 में ही रद्द करके सत्यवान को सूचित भी किया गया था। इस प्रकार रद्द फर्जी जाति प्रमाण पत्र लगाकर नौकरी पाने वाले डा. सत्यवान कुमार नायक के विरुद्ध आईपीसी की धारा 420 के तहत मुकदमा दर्ज कराने के बजाय 18 माह तक कई लाख रुपये लुटाये गये। क्योंकि प्राचार्य/ प्रबन्धक इस फ्राड मे शामिल हैं। इसीलिये बार-बार मौका देने पर भी जाति प्रमाण पत्र न देने वाले की सेवा बर्खास्तगी और लूट की रिकबरी के बजाय डा. सत्यवान के विरुद्ध केवल कार्य से विरत रहने की दिखावटी कार्यवाही ही की गयी थी ताकि वह कोर्ट चला जाय और शायद कोर्ट से वह राहत पा जाय। जिसकी शंका थी आखिर वही हुआ। डा. सत्यवान नवम्बर 2019 को माननीय हाईकोर्ट इलाहाबाद में काम और बेतन पाने का मुकदमा दायर किया लेकिन कोर्ट से उसे राहत नहीं मिली।
गौतम ने अपने खण्डन के माध्यम से आयोग को बताया कि विज्ञापन की शर्त के अनुसार बिना बैध जाति प्रमाण पत्र के अनुसूचित जनजाति के पद पर डा. सत्यवान कुमार नायक की नियुक्ति पूर्णतया फर्जी है। अतः कार्य से विरत रहने की दिखावटी और जालसाजी भरी कार्यवाही के बजाय सेवा से बर्खास्त कर उक्त एसटी का पद रिक्त घोसित किया जाय तथा फर्जी एसटी का जाति प्रमाण पत्र लगाकर नौकरी पाने वाले डा. सत्यवान के विरुद्ध आईपीसी की धारा 420 के तहत मुकदमा दर्ज करवाकर अबतक दिये गये बेतन की रिकबरी की जाय। इस फ्राड में शामिल प्राचार्य/प्रबंधक के विरुद्ध भी विधि सम्मत कार्यवाही होनी चाहिए तथा उक्त अनुसूचित जनजाति के पद को रिक्त/ शून्य घोषित किया जाय।



