नौहे की तर्ज़ निगारी के साथ अन्जुमनों ने नए नौहे की शुरु कर दी मश्शाक़ी

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। माहे मोहर्रम पर पढ़े जाने वाले नौहों को शायरों से लिखवा कर तर्ज़ निगारों से उसकी धुन बनवा कर अन्जुमनों ने नौहाख्वानों के साथ मश्शाक़ी (प्रेक्टिस)शुरु कर दी है।दरियाबाद की मातमी अन्जुमन हुसैनिया क़दीम,हुसैनिया रजिस्टर्ड,असग़रिया,मोहाफिज़े अज़ा,मोहाफिज़े अज़ा क़दीम,हाशिमया,रानी मण्डी की अन्जुमन अब्बासिया,हैदरया,आबिदया,मज़लूमिया,शब्बीरिया,बख्शी बाज़ार की अन्जुमन ग़ुन्चा ए क़ासिमया सहित डेढ़ दर्जन से अधिक मातमी अन्जुमनो व दस्तों ने मोहर्रम में ग़मज़दा नौहों और कलामों को शायरों से पहले ही लिखवा कर तर्ज़ बना ली थी अब नौहाख्वान उसे लोगों के सामने प्रस्तुत करने को बेहतरीन अदायगी के लिए प्रतिदिन आपस में मश्शाक़ी करने मे लगे हैं।अन्जुमन ग़ुन्चा ए क़ासिमया के प्रवक्ता सै०मो०अस्करी ने बताया की शायर तालिब इलाहाबादी,आमिर रिज़वी, के द्बारा लिखे गए ग़मगीन नौहों को तर्ज़ निगार शादाब ज़मन ने धुन व लैय के साथ अदा कराने को नौहाख्वानों व अन्य साथियों के साथ मश्शाक़ी शुरु कर दी।अस्करी अब्बास,शबीह अब्बास आदि ने देर रात तक नौहों की बेहतरीन अदायगी के लिए मश्शाक़ी मे भाग लिया।



