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गीता जयंती की पूर्व संध्या पर कारसेवकपुर में आयोजित कार्यक्रम

देश के गद्दारों ने भारतीयों में फैलायी भ्रांतियां: चम्पतराय

गीता जयंती की पूर्व संध्या पर कारसेवकपुरम में आयोजित हुआ कार्यक्रम

(अनुराग शुक्ला ) अयोध्या ( अनुराग दर्शन समाचार ) । हम लोगों को यह पढ़ाया गया कि अकबर महान था तो प्रश्न यह है कि अकबर से युद्ध करने वाले महान वीर योद्धा हिंदुस्तान के गौरव महाराणा प्रताप क्या थे क्योंकि दोनों तो महान नहीं हो सकते। इस तरह का इतिहास पढ़ा कर देश के गद्दारों ने भारतीयों में अनेक भ्रांतियां फैलाई जिनसे हमें अब उबरना ही होगा। उक्त विचार गीता जयंती की पूर्व संध्या पर कारसेवक पुरम में आयोजित गोष्ठी में विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष व श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय ने व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आजादी के 75 वे वर्ष में मनाए जाने वाले अमृत महोत्सव, शौर्य दिवस एवं गीता जयंती का आपस में बड़ा घनिष्ठ संबंध है।
गोष्ठी का शुभारंभ अनादि पंचमुखी महादेव मंदिर के आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण व चंपत राय ने प्रभु श्री राम एवं श्रीमद्भागवत गीता के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन करके किया। चंपत राय ने अपने संबोधन में बताया कि वर्ष 1992 में मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी को पड़ने वाली गीता जयंती 6 दिसंबर को थी इसलिए शौर्य दिवस प्रतिवर्ष 6 दिसंबर को ही मनाया जाता था । मन में बहुत दिनों से यह विचार था कि गीता जयंती तो प्रतिवर्ष अलग-अलग तिथियों में होता है इसलिए शौर्य दिवस गीता जयंती पर ही मनाना चाहिए । इस वर्ष यह संभव हो सका है आज यहां गीता जयंती की पूर्व संध्या पर इतना बड़ा कार्यक्रम मनाया जा रहा है तथा 14 दिसंबर को पूरे देश में बड़े ही व्यापक स्तर पर गीता जयंती का आयोजन किया जा रहा है। उदास होकर बैठने वाले अर्जुन को कर्म करने की प्रेरणा देने वाला ग्रंथ गीता हमारे अंदर गौरव एवं शौर्य का संचार करता है। हमें गुलामी के प्रतीकों से मुक्ति पाना ही होगा तभी हम पूर्ण स्वतंत्र हो सकेंगे। देश को हर तरह से स्वाभिमानी बनाने का कार्य तेजी से हो रहा है। बहुत से सड़कों, अस्पतालों और पार्कों के नाम बदले गए परंतु अभी इस दिशा में बहुत कार्य शेष है। गोष्ठी का संचालन सह मंत्री विवेक शुक्ला ने किया। प्रचार प्रसार प्रमुख डॉक्टर शैलेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि शौर्य सभा में प्रमुख रूप से संरक्षक पंडित रामजी मिश्रा, विजय कुमार सिंह बंटी, धीरेश्वर वर्मा, हिमांशु गुप्ता, मोहन शास्त्री, कौशिक प्रमाणिक, सुनील त्रिपाठी, वीर कुमार निषाद सुरेंद्र पांडेय ,वीरेश्वर वर्मा, भानु प्रकाश पांडे, विमल गुप्ता, मुन्ना सिंह, श्रीमती रीना द्विवेदी, श्रीमती श्यामा शर्मा, श्रीमती काजल पाठक, श्रीमती शांति गुप्ता, श्रीमती लता कश्यप आदि उपस्थित थे।

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