ई-स्टाम्प के कमीशन पर निर्णय सुरक्षित
यूपी स्टाम्प वेंडर एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार) । ई-स्टाम्प की बिक्री में सामान्य स्टाम्प पेपर की तुलना में कम कमीशन मिलने के खिलाफ दाखिल स्टाम्प वेंडरों की याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपना निर्णय सुरक्षित कर लिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति एसपी केशरवानी एवं न्यायमूर्ति अजय भनोट की खंडपीठ ने यूपी स्टाम्प वेंडर एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई के बाद दिया है।
स्टाम्प वेंडरों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एनसी राजवंशी ने कहा कि सरकार का दायित्व है कि लोगों को आर्थिक न्याय उपलब्ध कराए और असमानता दूर करे। ई-स्टाम्प बेचने के लिए लागू राज्य सरकार की नीति से स्टाम्प वेंडरों को आर्थिक नुकसान होगा। दूसरी तरफ अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता संजय गोस्वामी ने कहा कि ई-स्टाम्प रूल 2013 में स्टाम्प वेंडरों को ई-स्टाम्प बेचने के लिए अधिकृत नहीं किया गया है। उन्हें बाद में संशोधित नियम 2019 में अधिकृत किया गया है। वर्तमान में सरकार के पास 17 हजार करोड़ रुपये से अधिक के स्टाम्प का स्टॉक है जिसे बेचने में दो साल से अधिक का समय लगेगा। ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता है कि ई-स्टाम्प बेचने से स्टाम्प वेंडरों की आमदनी पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा।
सरकारी अधिवक्ता का यह भी कहना था कि याची के पास सिर्फ अपने लाइसेंस की शर्तें लागू कराने का अधिकार है। उन्होंने ई-स्टाम्प अधिकृत बिक्री केंद्र के लिए आवेदन नहीं किया है। इसलिए वे ई-स्टाम्प रूल के तहत नहीं आते हैं। कोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद निर्णय सुरक्षित कर लिया है।




