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शिव को प्रिय है प्रदोष व्रत: अनन्त पार्थिव शिवलिंग निर्माण महायज्ञ का 13वाँ दिन

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। पूर्व घोषित कार्यक्रमानुसार नैतिक विकास शोध संस्थान सेवा ट्रस्ट प्रयाग के तत्वाधान में सावन महोत्सव के अवसर पर जारी अनन्त पार्थिव शिवलिंग निर्माण महायज्ञ आज संस्थान के केंद्रीय कार्यालय शेरडीह झूँसी प्रयाग में 13वें दिन भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए विश्व जनकल्याण की भावना से जारी रहा। आज प्रदोष व्रत त्रयोदशी होने के कारण भगवान शिव की विशेष पूजा आरती संपन्न हुई। आज वरिष्ठ समाजसेवी फूलचन्द्र यादव ने सपत्निक प्रदोष व्रत धारण कर पार्थेश्वर महादेव का अभिषेक कर सर्वमनोरथ को पूर्ण करने हेतु भगवान भोलेनाथ से वरदान माँगा। यज्ञ स्थल पर महाशिवपुराण कथा का अमृतपान कराते हुए पं0 पवन देव जी महराज ने कहा कि प्रदोष व्रत सभी व्रतों में सर्वश्रेष्ठ फलदायक है और इस व्रत के प्रभाव से शत्रुओं पर विजय की प्राप्ति होती है। इस सम्बन्ध में एक कथा का दृष्टांत देते हुए श्री महाराज ने कहा कि एक समय देवताओं और असुरों में भीषण युद्ध चल रहा था वृत्तासुर नामक राक्षस के प्रभाव से सारे देवता हार के डर से गुरु बृहस्पति भगवान के पास गए और अपना कष्ट सुनाया तब श्री गुरुदेव ने देवताओं से प्रदोष व्रत की महिमा का महत्व बताते हुए देवताओं से प्रदोष व्रत धारण करने को कहा जिसके पश्चात सभी देवताओं ने त्रयोदशी तिथि को व्रत धारण करके पूरे विधि विधान के साथ एक वर्ष तक भगवान शिव की पूजा करते रहे और जब प्रदोष काल आवे तो शिवलिंग की स्थापना कर उनका अभिषेक किया जिसके प्रभाव से और शिवजी की कृपा का आश्रय लेकर जब उन्होंने वृत्तासुर के साथ युद्ध किया और इंद्र के वज्र द्वारा वृत्तासुर मृत्यु को प्राप्त हुआ अतः सभी भक्तों को चाहिए कि इस प्रदोष व्रत को श्रद्धा के साथ धारण करें और भगवान शिव के चरित्रों का गुणगान करें।
आज के अभिषेक आरती में मुख्य रूप से फूलचंद्र यादव, भोला यादव, सुजीत यादव के अलावा संरक्षक फूलचंद्र दुबे, नागेंद्र सिंह, राजेंद्र तिवारी दुकानजी, संजय बनकटा, विजय तिवारी, सत्य प्रकाश पाण्डेय, जितेंद्र शुक्ला सहित यज्ञ संयोजक श्याम सूरत पाण्डेय उपस्थित रहे।

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