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कोरोना जांच के झमेले में उलझे हाईकोर्ट कर्मचारी, एक रिपोर्ट पाजिटिव तो दूसरी आई निगेटिव


कोरोना जांच के झमेले में उलझे हाईकोर्ट कर्मचारी
जब नहीं मिल रही जांच रिपोर्ट तो कैसे करें प्रस्तुत

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार) । एक ओर इलाहाबाद हाईकोर्ट कोरोना वायरस के संक्रमण, इलाज और इससे बचाव को लेकर सक्रियता दिखा रहा है वहीं दूसरी ओर कोरोना जांच के बाद सामने आ रही रिपोर्ट लोगों की मुसीबत का सबब बन रही हैं। एक ही दिन में एक ही शख्स की दो जगह कोरोना जांच हुई और एक रिपोर्ट पाजिटिव तो दूसरी निगेटिव आई। रिपोर्ट के इस झमेले में हाईकोर्ट के कई अधिकारी व कर्मचारी भी आ गए हैं।
हाईकोर्ट के महानिबंधक अजय कुमार श्रीवास्तव ने स्टाफ से राजापुर स्थित कैम्प में कोरोना जांच कराने को कहा है। कैम्प में भीड़ से बचने के लिए हाईकोर्ट के कुछ अधिकारियों ने धूमनगंज जांच केन्द्र पर जांच करा ली। बाद में उनसे कहा गया कि हाईकोर्ट स्टाफ के लिए हाईकोर्ट के कैम्प में जांच कराना जरूरी है तो वो राजापुर कैम्प पहुंचकर वहां भी जांच करा ली। जब रिपोर्ट आई तो धूमनगंज में पॉजिटिव और राजापुर कैम्प की रिपोर्ट निगेटिव आई।
हाईकोर्ट के एक अनुभाग अधिकारी व दो समीक्षा अधिकारियों को कुछ ऐसी ही स्थिति का सामना करना पड़ा। उनकी एक ही दिन में लिए गए नमूनों की रिपोर्ट पॉजिटिव व निगेटिव आई। ऐसे अन्य कई कर्मचारी हैं, जिन्हें ऐसी परेशानी झेलनी पड़ रही है। उन्होंने उप निबंधक के मार्फत महानिबंधक से इस संबंध में शिकायत की है। निबंधक शिष्टाचार आशीष कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि जब दो रिपोर्ट विरोधाभाषी हैं तो तीसरी जांच कराई जानी चाहिए। शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
उच्च न्यायालय प्रशासन अपने कर्मचारियों से करोना जांच कराकर उसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश निर्गत कर चुका है और जांच रिपोर्ट नहीं मिलने से हाईकोर्ट के कर्मचारियों के लिए उस आदेश का अनुपालन संभव नहीं हो रहा है। उधर, हाईकोर्ट कर्मचारी अधिकारी संघ के महासचिव बृजेश शुक्ल ने कहा कि सिर्फ पॉजिटिव रिपोर्ट की सूचना फोन पर देकर आइसोलेशन की सलाह दी जा रही है। जबकि निगेटिव आने पर न तो सूचना और न ही रिपोर्ट दी जाती है। उन्होंने मांग की है कि प्रत्येक व्यक्ति को जांच रिपोर्ट अवश्य उपलब्ध कराई जाए।
इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के महासचिव प्रभाशंकर मिश्र को सरकारी जांच में पॉजिटिव बताया गया। उन्होंने दो दिन बाद प्राइवेट जांच कराई तो निगेटिव पाए गए। उसके बाद वकीलों ने भी जांच पर सवाल उठाया है। हाईकोर्ट बार के पूर्व महासचिव जेबी सिंह का कहना है कि कोरोना जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आते ही संबंधित व उसके परिवार की कैदी जैसी हालत कर दी जाती है। गलत रिपोर्ट पर लोगों के जीवन के अधिकार से खिलवाड़ किया जा रहा है। ऐसे में जांच में अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है।

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