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गर्म रेती पर मैं गिरता हूँ सम्भालो अम्मा

दरियाबाद इमामबाड़े में अन्जुमन नक़विया ने किया सरों पर छूरीयों का मातम

बख्शी बाज़ार में मौलाना मो०जावेद ने माहे मोहर्रम की नवीं पर पढ़ा करबला के शहीदों का गम्गीन मसाऐब

रात भर होता रहा विभिन्न इमामबाड़ो व अज़ाखानों में ज़िक्रे शोहदाए करबला

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। आज माहे मोहर्रम की नवीं तारीख को करबला के बहत्तर शहीदों को शिद्दत से याद किया गया।बख्शी बाज़ार,करैली,रानीमण्डी,दरियाबाद,चक,घंटाघर,बरनतला,पान दरिबा,सब्ज़ी मण्डी सहित सैकड़ों अज़ाखानों में दस दिवसीय अशरे की मजलिस के नौवें दिन भी ओलमाओं ने करबला के बहत्तर शहीदों की क़ुरबानी का मार्मिक अन्दाज़ में ज़िक्र किया।बख्शी बाज़ार स्थित स्व अबरार हुसैन के अज़ाखाने में इरान से लौटे दरियाबाद के मौलाना मो०जावेद ने शहीदे करबला का मार्मिक अन्दाज़ मे ज़िक्र किया वहीं चक स्थित इमामबाड़ा डिप्यूटी ज़ाहिद हुसैन में मौलाना रज़ी हैदर,घंटाघर स्थित इमामबाड़ा सय्यद मियाँ में ज़ाकिरे अहलेबैत रज़ा अब्बास ज़ैदी ने ऑनलाईन मजलिस को सम्बोधित किया।बहादुरगंज स्थित वक़्फ इमामबाड़ा ग़ुलाम हैदर में अशरे की नवीं मजलिस को मौलाना डॉ०रिज़वान हैदर रिज़वी ने खिताब करते हुए इमाम हुसैन की शहादत का ज़िक्र किया।बताया की इमाम हुसैन जब लाखों के यज़ीदी लश्कर से घिर गए और ज़ालिम यज़ीदी फौज ने उन पर हर तरफ से हमला कर दिया तो इमाम हुसैन ने अपनी माँ जनाबे फात्मा ज़हरा से फरीयाद करते हुए कहा गर्म रेती पर मैं गिरता हूँ सम्भालो अम्मा
थक गया लाश उठा कर मैं भरे लशकर की
लाश क़ासिम की मैं लाया कभी अकबर की
खुद बनाई है लहद मैने अली असग़र की
दो तसल्ली मुझे सीने से लगा लो अम्मा
गर्म रेती पर मैं गिरता हूँ सम्भालो अम्मा
मजलिस में ग़मगीन नौहे सुन कर लोग सिसकियाँ ले ले कर रोने लगे।मजलिस में वक़ार रिज़वी,सै०मो०अस्करी,ज़ामिन हसन,अली सज्जाद आदि मौजूद रहे वहीं दरियाबाद पीपल चौराहा स्थित शौकत भारती के अज़ाखाने पर मजलिस के बाद अन्जुमन नक़विया के नौहा ख्वान शबी हसन,शारुख आब्दी ने रौनक़ सफीपुरी व डॉ०नायाब बलयावी का मसायबी नौहा पढ़ा।अन्जुमन के सदस्यों ने सर पर तेज़ धार की छूरीयों से क़माज़नी कर अपने आप को लहु लुहान कर लिया।

अन्जुमन हैदरया व अन्जुमन ग़ुन्चा ए क़ासिमया ने ४० इमामबाड़ों पर पढ़े नौहे

मोहर्रम की नवीं को खानदाने रसूल की शहादत की आखरी रात मानते हुए ४० इमामबाड़ों पर मुस्लिम औरतें व मर्द जहाँ गश्त करते हुए ज़ियारत करने पहोँचते हैं वहीं इमामबाड़ों पर अगरबत्ती के साथ मोमबत्ती जला कर चराग़ाँ भी करने की परम्परा है। अन्जुमन ग़ुन्चा ए क़ासिमया के प्रवक्ता सै०मो०अस्करी के मुताबिक़ नौ मोहर्रम की शब में दरियाबाद,रानीमण्डी,बख्शी बाज़ार,दायरा शाह अजमल,चक ज़ीरो रोड,बरनतला,सब्ज़ी मण्डी,बड़ा ताज़िया,बुड्ढा ताज़िया सहित तक़रीबन सभी इमामबाड़े पुरी रात लोगों की ज़ियारत को खुले रहे।क्या औरतें क्या मर्द और क्या बच्चे सभी एक इमामबाड़े से दूसरे इमामबाड़े में मोमबत्ती रौशन करने के साथ ज़ियारत को पहोँचते रहे।रात भर चलता रहा मन्नतों व मुरादों के मांगने का दौर।अज़ाखाने में लोगों के पहोँचने के कारण रात भर रतजगा रहै।

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