लड़की हूँ मैं..!! उलझे हुए मिजाज की सुलझी ….- दिव्यांशी निषाद


लड़की हूँ मैं..!! उलझे हुए मिजाज की सुलझी हुई लड़की हूँ मैं । जवाब-तलब करू तो दुनिया के लिए भड़की हूं मैं अपने लक्ष्य को पाने की जिद्दी हूँ मैं । जिंदगी में अपनी गुमशुद सी लड़की हूँ मैं सहन न कर लोगो की बात, छोड़ कर लिहाज दूं लोगो को जवाब नही कम संस्कारी हूँ मैं । किस्मत, इश्क और हालात के आगे हारी हूँ मैं । अपने मुताबिक़ जिंदगी जीने वाली आत्मनिर्भर लड़की हूँ मैं । पुरे करने वाली आरजू अपने माता-पिता की अभिमान हूँ मैं । न लड़ सकू तो कमजोर और असहाय हूँ मैं । जमाने से लड़कर करू अपने ख्वाहिश पूरे तो गलत लड़की मैं। सहु अत्याचार तो बेबस हूँ मैं। उठाऊ अवाज तो बुलंद हुँ मैं। घर मे रहु तो शांत और ठीक हूँ मैं। करू अपने मन की तो खराब लड़की हूँ मैं। न दू लोगो को जवाब तो अशिक्षित हूँ मैं। दू सबको ज्ञान तो तेज हूँ मैं। न करू पुरूष से बात तो कमजोर और डरती हूँ मैं। करू बात रखकर समानता का अधिकार तो चरित्रहीन लड़की हूँ मैं। खामोश रहू तो लहजा हूँ मैं। बोलू तो बेशरम हूँ मैं
तो बता दू अबला नहीं सबला हूँ मैं। मुश्किलों से लड़ने वाली मजबूत चट्टान हूँ मैं। चरित्रहीन नहीं, समझो तो सिर उठा कर जीने वाली तमनाओं से भरी अकाश मै
दिव्यांशी निषाद इलाहाबाद यूनिवर्सिटी सी.एम.पी कॉलेज
इलाहाबाद उत्तर प्रदेश


