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Exclusive:भारतीय किसान यूनियन अध्यादेशओं को कृषि क्षेत्र में कंपनी राज के रूप में देख रही है

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। केंद्र सरकार द्वारा 5 जून को लागू किए गए अध्यादेश का देश के किसान नो द्वारा विरोध कर रहे हैं। वहीं सरकार द्वारा इन अध्यादेश को एक देश एक बाजार के रूप में कृषि सुधार की दशा मैं एक बड़ा कदम बता रही है। भारतीय किसान यूनियन इन अध्यादेशओं को कृषि क्षेत्र में कंपनी राज के रूप में देख रही है । कुछ राज्य सरकारों के द्वारा उसको संघीय ढांचे का उल्लंघन मानते हुए इन्हें वापस लिए जाने की मांग कर रही है । देश के अनेक हिस्सों में इसके विरोध में किसान आवाज उठा रहे हैं ।किसानों को इन कानून को बनाए जाने का खतरा सता रहा है । कृषि मैं कानून नियंत्रण मुक्त विपणन भंडार आयात निर्यात किसान हित में नहीं है । इसका खामियाजा देश के किसान विश्व व्यापार संगठन के रूप में भी भुगत रहे हैं। देश में 1943-44 मैं बंगाल के सूखे के समय ईस्ट इंडिया कंपनी के अनाज भंडारण के कंपनियों द्वारा किया जा रहा शोषण अति शीघ्र बंद हो और इस कदम से किसानों की आय में वृद्धि होगी।

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