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संगम क्षेत्र में सुरक्षा इंतजाम पर हाईकोर्ट सख्त

सूबे के मुख्य सचिव से मांगा व्यक्तिगत हलफनामा

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रयागराज में संगम क्षेत्र की सालभर सुरक्षा इंतजाम करने के आदेश की अनुपालन रिपोर्ट तलब की है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव राजेन्द्र प्रसाद तिवारी से प्रयागराज में संगम पर स्नान व धार्मिक क्रियाकर्म आदि करने आने वालों के लिए वर्षभर सुरक्षा इंतजाम करने के आदेश की अनुपालन रिपोर्ट के साथ व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है। कोर्ट ने उनसे सख्त लहजे में कहा है कि निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो न्यायालय उनके खिलाफ अवमानना कार्यवाही करेगा। यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने टीना श्रीवास्तव व अन्य की अवमानना याचिका पर अधिवक्ता बालेश्वर चतुर्वेदी को सुनकर दिया है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि मुख्य सचिव ने तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन इस संबंध में रिपोर्ट तैयार करने के लिए किया है, इसलिए सुनवाई दो माह के लिए स्थगित की जाए। कोर्ट ने इसे नहीं माना और आदेश का पालन करने का निर्देश दिया है।
एडवोकेट बालेश्वर चतुर्वेदी के अनुसार 19 सितम्बर 2015 को कुछ लोग अस्थि विसर्जन के लिए संगम गए थे। जल निगम की नाव पर 18 लोग सवार होकर अस्थि विसर्जन के लिए संगम जा रहे थे। कुछ दूर जाने के बाद नाव यमुना नदी में पलट गई। नाव पलटने से हाईकोर्ट के अधिवक्ता श्रवण कुमार श्रीवास्तव, अजय कुमार श्रीवास्तव व शंकर लाल मौर्य की डूबने से मौत हो गई। दूसरे नाविकों ने अन्य 15 लोगों को बचा लिया। बाद में याचियों ने याचिका दाखिल कर संगम पर सुरक्षा उपायों सहित जीवन यापन के लिए मुआवजा दिलाने की मांग की।
कोर्ट ने मुख्य सचिव को प्रयागराज स्थित संगम पर स्नान आदि करने आने वालों के लिए केवल माघ मेले में ही नहीं बल्कि पूरे वर्ष सुरक्षा इंतजाम करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने मुआवजे के मुद्दे पर कानून के अभाव के कारण कोई आदेश तो नहीं दिया लेकिन मुख्य सचिव से याचियों की स्थिति को देखते हुए आर्थिक सहायता या नौकरी देने के संबंध में निर्णय लेने का निर्देश दिया था। इन आदेशों का पालन न करने पर यह अवमानना याचिका दाखिल की गई है। याचिका पर अगली सुनवाई 26 नवम्बर को होगी।

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