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दरोगा के खिलाफ परिवाद खारिज करने का आदेश रद

गैरजमानती वारंट के बावजूद अदालत में हाजिर होने से बचा दरोगा

हाईकोर्ट ने जतायी नाराजगी, निगरानी याचिका की स्वीकार

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अधिवक्ता की ओर से परिवाद पर तलब दरोगा की अदालत में उपस्थिति सुनिश्चत कराने की बजाय परिवाद खारिज करने पर नाराजगी जताई है। साथ ही परिवाद पर सीजेएम मुरादाबाद का 13 अगस्त 2018 का आदेश रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि यह आदेश बताता है कि आरोपी दरोगा परिवाद के विरुद्ध निगरानी खारिज होने और गैरजमानती वारंट जारी होने के बावजूद अदालत में हाजिर होने से बच गया। यह बहुत आश्चर्य की बात है कि मजिस्ट्रेट ने कोर्ट में उसकी उपस्थिति सुनिश्चित कराने की बजाय परिवाद ही खारिज कर दिया।
यह आदेश न्यायमूर्ति डॉ केजे ठाकर ने मुरादाबाद के अधिवक्ता राजबीर सिंह की निगरानी याचिका स्वीकार करते हुए दिया है। कोर्ट ने एसपी मुरादाबाद को आदेश की प्रति भेजने का निर्देश देते हुए कहा है कि एसपी इस अदालत को बताएं कि मजिस्ट्रेट द्वारा दरोगा की अदालत में उपस्थिति सुनिश्चत कराने के लिए उन्हें भेजे गए नोटिस पर उन्होंने ने क्या कार्रवाई की है। कोर्ट का कहना है कि एसपी ने दरोगा को संरक्षण दिया क्योंकि उन्होंने मजिस्ट्रेट के नोटिस पर कोई कार्रवाई नहीं की। अधिवक्ता राजबीर सिंह ने सब इंस्पेक्टर जय भगवान के खिलाफ सीजेएम मुरादाबाद के यहां परिवाद दाखिल किया था, जिस पर सीजेएम ने चोरी, झूठे तथ्य प्रचारित करने आदि आरोपों पर सुनवाई करते हुए दरोगा को सम्मन भेजा। दरोगा ने इस समन के खिलाफ सेशन कोर्ट में निगरानी में दाखिल की, जो खारिज हो गई। इसके बाद भी वह अदालत में बयान दर्ज कराने के लिए हाजिर नहीं हुए। सीजेएम ने गैर जमानती वारंट जारी करते हुए एसपी मुरादाबाद को नोटिस भेज कर दरोगा की उपस्थिति सुनिश्चित कराने को कहा लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस दौरान परिवादी वकील बीमार हो गए। मजिस्ट्रेट ने प्रोसेस फीस जमा न करने और परिवादी के हाजिर न होने के आधार पर 13 अगस्त 2018 को परिवाद खारिज कर दिया। इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।

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