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जान भी-जहान भी’’ आनलाईन चित्रकला शिविर समापन समारोह

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र प्रयागराज, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 20 अक्टूबर से 24 अक्टूबर तक आॅन लाइन चित्रकला शिविर ‘‘जान भी-जहान भी’’ का आयोजन किया गया। चित्रकला शिविर में केन्द्र के कार्यक्षेत्र राज्यों उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, उत्तराखण्ड व बिहार के लोक चित्रकार व समकालीन चित्रकारों को सम्मिलित किया गया। ये ऐसे कलाकार व चित्रकार है जो स्वतंत्र रूप से कार्य कर रहे है जिनको भारत सरकार व राज्य सरकार से कोई भी वित्तीय सहायता प्राप्त नही हो रही है। शिविर के समापन अवसर पर कलाकारों द्वारा अपने द्वारा रचित चित्रों को ब-खुबी-ढंग से प्रस्तुत किया गया। जिसमें उत्तराखण्ड के तीज और त्यौहारों पर सगुन के रूप में बनाये जाने वाले एैपड़ कला को अपने चित्रों में कुरेद कर पिथौरागढ़ की नंदिता महर ने अपने चित्रों में परिदृश्य के साथ प्रस्तुत किया गया, वहीं मयंक शर्मा (राजस्थान) ने अपने चित्र के माध्यम से कोरोना की परिस्थिति में लाॅकडाउन के दौरान आत्मचिन्तन को दर्शाया है, प्रदीप्ता किशोर दास (राजस्थान) ने महात्मा गांधी और उनके विचारों को चित्रों के माध्यम से उकेरा है। साथ ही बिहार के रामजी नायक ने अपने लोक चित्र कला विधा मधुबनी के माध्यम से महाकाल के रूप को प्रदर्शित किया। उ0प्र0 के वाराणसी जनपद के योगेश ने कोरोना के समय में बनारस शहर की विविधता को कैनवास मेें रंगों के माध्यम से प्रदर्शित किया। हरियाणा की संगीता कुमार मूर्ति ने अपने द्वारा बनायी गयी चित्र में ‘‘जान भी जहान भी’’ को विस्तार पूर्वक वर्णित कर योग, मास्क, दो गज की दूरी व अन्य माध्यम को चित्रित किया। फैजाबाद की दीपा सिंह रघुवंशी ने लोक चित्रकला के माध्यम से अपने विचारों को रंगों के द्वारा कैनवास पर दर्शाया। गाजियाबाद के नवल किशोर ने समय को चित्र में पिरोया जो वर्तमान समय के परिदृश्य को दर्शाता है। राजस्थान के अभिषेक जोशी ने फड़ पेन्टिग के माध्यम से मास्क, के साथ मुगल शैली का प्रयोग कर चित्रित किया। मध्य प्रदेश की गीता बारिया ने उत्सव को गोंड चित्र शैली के माध्यम से प्रस्तुत किया। दिल्ली के संजीब गोगोई ने अपने चित्र के माध्यम से शान्ति एवं सौहाद्र्व को दिखाया। राजस्थान के मुकेश कुमार ने फड़ चित्र के माध्यम से वीरता को दर्शाया और उत्तराखण्ड के दीपक तिवारी, दिल्ली के सुनील मल्होत्रा व उ0प्र0 की नमिता अरझरिया ने भी शीर्षक ‘‘जान भी- जहान भी’’ को ध्यान में रखते हुए रंगों को कैनवास पर बिखेरा। इस अवसर पर केन्द्र निदेशक ने सभी आमंत्रित चित्रकारों एवं कलाकारों को शिविर की सफलता के लिए बधाई दी और केन्द्र परिवार की ओर से उनका आभार व्यक्त करते हुए इस प्रकार के आयोजन में पुनः आमंत्रित किये जाने का आश्वासन दिया। साथ ही शिविर से जुड़े सभी प्रतिनिधियों को केन्द्र अधिकारी/कर्मचारियों के साथ कला जगत से जुड़े विद्वानों का भी आभार व्यक्त किया।

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