हिंदी की सेवा करना सरस्वती का उद्देश्य: हृदय नारायण

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। ऐतिहासिक सरस्वती पत्रिका का वर्चुअल लोकार्पण उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने किया।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि साहित्य का उद्देश्य लोकमंगल है। वैदिक ऋषियों ने भी सरस्वती के महत्व को बताया और सरस्वती ज्ञान की देवी बनीं। इस पत्रिका का उद्देश्य हिंदी की सेवा करना था।
आज सरस्वती पुन: प्रकट हुई हैैं, जिससे साहित्य जगत में लोकमंगल की भावना का अभाव दूर होगा। उन्होंने कहा कि 40 साल बाद शुरू हुई यह पत्रिका फिर उसी रूप में लोगों तक पहुंचेगी। इसकी तुलना किसी और पत्रिका से नहीं की जा सकती।
हिंदुस्तानी एकेडमी सभागार में आयोजित वर्चुअल लोकार्पण समारोह में विशेष अतिथि परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश के परमाध्यक्ष चिदानंद सरस्वती ने कहा कि साहित्य के माध्यम से ही हम श्रेष्ठ विचारों को एक दूसरे के हृदय तक पहुंचा सकते हैैं। भारतीय संस्कृति के महत्व को उजागर करते हुए सबका साथ सबका विकास कर सकते हैैं। मुख्य अतिथि शिक्षा मंत्रालय के केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल के उपाध्यक्ष अनिल शर्मा जोशी, विशिष्ट अतिथि डॉ. कमल किशोर गोयनका ने सरस्वती पत्रिका की विशेषताओं पर व्याख्यान दिया। आयोजन हिंदुस्तानी एकेडमी, इंटैक प्रयागराज चौप्टर एवं इंडियन प्रेस प्रयाग के संयुक्त तत्वावधान में हुआ।
एकेडमी के रविनंदन ने कहा कि सरस्वती पत्रिका भारतीय नवजागरण का मुखपत्र तथा राष्ट्रीय चेतना की मुखर संवाहिका थी। यह हिंदी साहित्य की पहचान रही है और पुनप्र्रकाशन के बाद भी यह अपने पुराने तेवर के साथ निकलती रहेगी। अध्यक्षता हिंदुस्तानी एकेडमी के अध्यक्ष डॉ. उदय प्रताप सिंह व संचालन एकता शुक्ला ने किया।



