दीपावली के दिन ही पहुंचाया भाई दूज का टीका

कोरोना के कारण नहीं दी जा रही कैदियों से मिलने की इजाजत
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। केन्द्रीय कारागार (सेंट्रल जेल) नैनी में बंद कैदियों के माथे पर टीका लगाकर लंबी उम्र की कामना करने वाली बहनें इस बार मायूस हैं। कोरोना की वजह से जेल में बंद कैदियों से मिलने की इजाजत बहनों को नहीं दी गई है। लिहाजा बहने दीपावली के दिन शाम चार बजे तक भाइयों को दूज का टीका पहुंचाने के साथ ही लाई, गट्टा, मिठाई और गणेश भगवान की मूर्ति लेकर जेल के बाहर बने कांउटर तक पहुंचीं।
वहां उन्होंने अपने भाइयों के लिए सामान वाले झोले में पर्ची डालकर जेल प्रशासन की सुपुर्दगी में दे दिया और मायूस होकर लौट गईं। जेल प्रशासन के अनुसार चार हजार कैदियों वाली जेल में 546 बहनों ने भाइयों के लिए भाई दूज का संदेश और प्रसाद भेजा है। जिसे सेनिटाइज करके 16 नवंबर को जेल के अंदर बांटा जाएगा। जेल में बंद भाइयों की लंबी उम्र की कामना लिए सामान का थैला लेकर दीपावली के दिन सुबह से ही जेल परिसर में बहनों की लंबी कतार लग गई।
अंदर न जा पाने के बावजूद बाहर से भाइयों को तिलक करने आईं बहनों ने भाइयों से सौगंध ली, कि वह आगे ऐसा कोई भी कार्य नहीं करेंगे, जिससे उन्हें कारावास में दिन गुजारने पड़ें और भाई दूज पर उन्हें इस तरह मायूस लौटना पड़े। जेल मे भाइयों को दूज का टीका और दीपावली की मिठाई पहुंचाने वालों मे अल्लापुर की रत्ना की तरह ही राधा निवासी अतरसुइया, किरन नैनी, गार्गी देवी, मोनिका खुल्दाबाद, संगीता और दो बहनें उर्मिला और सर्मिला की तरह ही सैकड़ों बहनें अपने भाइयों की सलामती के लिए दूज का टीका लेकर सुबह आठ से शाम चार बजे तक कतार में नजर आईं।
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दुआ मांग कर लौंटी बहनें
प्रयागराज। अतर्रा बांदा से आईं सुनीता देवी ने बताया कि सोमवार को भैयादूज था। हम जेल में टीका करने आते थे। हमारा भाई पांच साल से जेल में बंद है। इस बार अंदर जाने की अनुमति नहीं मिली। जेल में हम लोगों को टीका नहीं करने दिया गया। हम सब ने बाहर से भाइयों की लंबी उम्र की कामना की है और ईश्वर से प्रार्थना की है कि हमारे भाइयों को सही और नेक रास्ते पर चलना सिखाए। साथ ही हमारे भाई दोबारा ऐसा कोई अपराध न करें, जिससे उनको जेल आना पड़े। फतेहपुर से आई साधना देवी ने कहा कि हम सात साल से भाईदूज मनाने जेल आते हैं। हर साल मैं भाई को टीका करती हूं। इस बार कोरोना की वजह से अनुमति नहीं मिली, इसलिए पहले ही सामान पहुंचाने आई हूं। प्रतापगढ़ से आईं रोली देवी ने बताया कि मार्च से भाई का मुंह नहीं देखा। आज भी मायूस लौट रही हूं। ऊपर वाले से दुआ है कि जल्द हमारे भाई बाहर आएं और उन्हें नेक रास्ते पर चलाएं।




