बाबा विनोवा भावे के 49वीं पुण्यतिथि मनाई

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। आज भूदान आंदोलन : अहिंसा का एक प्रयोग और उसकी प्रासंगिकता विषय पर दारागंज स्थित आंदोलन कार्यालय में संगोष्ठी आयोजित की गई । इस दौरान भूदान विनियोजन आंदोलन कोर टीम ने आचार्य विनोवा भावे के भूदान यज्ञ आंदोलन के सम्पूर्ण इतिहास और दस्तावेज को व्यापक परिप्रेक्ष में प्रस्तुत करनेवाली पराग चोलकर कृत त्रिखण्डिय ग्रंथ “सबै भूमि गोपाल की” को भूदान विनियोजन आंदोलन के संविधान और पथ प्रदर्शक के रूप में स्वीकार किया गया । उक्त संविधान ग्रंथ की पूजा अर्चना करके अंगीकृत करने के उपरांत उसके सूत्रों के संकलन का दायित्व श्री सत्येंद्र तिवारी को सौप गया । संगोष्ठी के मुख्य अतिथि श्री सर्वेश यादव जी ने कहा कि बाबा विनोवा का भूदान यज्ञ आंदोलन अहिंसा का एक प्रयोग था जो व्यापक अर्थो में स्वैच्छिक भूमि सुधार के रूप में प्रस्तुत हुआ। भूदान विनियोजन आंदोलन की अध्यक्षा श्रीमती शिमला श्री त्रिपाठी ने कहा कि बाबा द्वारा 13 वर्षो की देश भर में पदयात्रा करके देश के करोड़ो भूमिहीन भाई बहनों के लिए दान में पाई गई लगभग 46 लाख एकड़ जमीनों में से आधी से ज्यादा दबंगो और कृतघ्न वारिशों के बलात कब्जे में है जो आज तक न तो उनसे मुक्त कराई गई है और न ही उन्हें वितरित ही कि गई है। उन्होंने अत्य कि केंद्र और राज्य सरकारों ने भी भूदान यज्ञ की जमीनों पर अनाधिकृत कब्जा किया है जैसे कि झूंसी का थाना और गोविंद वल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान । कहा कि यह आंदोलन देश भर की भूदान की जमीनों को हर स्तर से मुक्त करा करा कर उनका भूमिहीनों में वितरण सुनिश्चित कर। संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए श्री केके राय जी ने स्वयं तथा श्री शिव कुमार जी के हवाले से आंदोलन स्मरण कर बताया कि देश के लाखों समर्थ लीगो ने करोड़ो भूमिहीनों के लिए अपनी जमीनें प्रेमपूर्वक दिया जिसका वितरण प्रदेश सरकारों के जिम्मे है लेकिन वे बेपरवाह है ।
संगोष्ठी में बृजेश कुमार सक्सेना, विवेक , सविता आदि ने भी अपने विचार रखते हुए प्रदेश में शेष जमीनी के उत्तर प्रदेश भूदान अधिनियम,1952 की व्यवस्था के अनुसार भूमिहीनों में वितरित किये जाने की जरूरत बताई ।


