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पहली बार नहीं होगी इंदिरा मैराथन

( विनय कुमार मिश्रा ) प्रयागराज ( अनुराग दर्शन समाचार)। कोरोना ने संगमनगरी में साढ़े तीन दशक पुराने मैराथन दौड़ पर ग्रहण लगा दिया है। इस साल पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की जन्मतिथि पर उनकी स्मृति में होने वाली अखिल भारतीय मैराथन नहीं होगी। 35 वर्षो में पहली बार ऐसा होगा जब सत्र शून्य रहेगा। शहर के ही नहीं, आयोजन में भाग लेने वाले दूरदराज के धावक इससे निराश हैं।

वर्ष 1985 में पहली बार यह आयोजन हुआ था। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने हरी झंडी दिखाई थी। इसके बाद आनंद भवन से दौड़ शुरू होने लगी। वर्ष 1990 में यह मैराथन बाधित हुआ जब तत्कालीन खेल मंत्री असलम खान ने आयोजन स्थल देहरादून कर दिया था। इसका बड़े पैमाने पर विरोध हुआ। उस साल दौड़ नहीं हो सकी। हालांकि सत्र बाधित नहीं हुआ। वर्ष 1990 की मैराथन का आयोजन वर्ष 1991 में 18 मार्च को हुआ और फिर 19 नवंबर 1991 को भी दौड़ हुई। दबाव बढऩे पर दोबारा आयोजन स्थल प्रयागराज (पूर्ववर्ती इलाहाबाद) किया गया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मैराथन वापस लाओ अभियान भी चलाया था।
क्षेत्रीय क्रीड़ाधिकारी अनिल तिवारी के अनुसार कोरोना संक्रमण के चलते 2020 में खेल मंत्रालय की तरफ से कोई कैलेंडर नहीं जारी किया गया। इसकी वजह से मैराथन का आयोजन नहीं हो पा रहा है। कुल 42.195 किलोमीटर की इस मैराथन में देशभर के धावक शामिल होने आते हैं।

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