खींचा गया शहर के विकास का खाका

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। नगर निगम में बुधवार को शहर के विकास का खाका खींचा गया। शोरशराबे व हंगामे के बीच 7 अरब 17 करोड़ 68 लाख 19 हजार का बजट वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए मंजूर किया गया।
हंगामे के बीच 717.68 करोड़ का बजट मंजूर
बैठक में अनुपस्थित मुख्य लेखा परीक्षक निलंबित
इस दौरान अलग-अलग मदों से जुड़े बजट की राशि में इजाफा भी किया गया। हालांकि बजट को जून माह में हुई नगर निगम की कार्यकारिणी ने पहले ही स्वीकृति दे दी थी। बैठक के दौरान अधिकारियों के प्रति पार्षदों का गुस्सा भी साफ झलका। खासतौर पर अलाव की व्यवस्था में ढिलाई व फर्जीवाड़ा का भी आरोप लगा।
नगर निगम सदन की बैठक महापौर अभिलाषा गुप्ता नंदी की अध्यक्षता में शुरू हुई। शुरुआत में ही पार्षदों ने पार्षदों ने नियमावली को लेकर हंगामा किया। कहना था कि सदन से ऊपर अधिकारी नहीं होते हैं। गृह व जलकर के मुद्दे पर पार्षदों ने कहा कि कोई भी नियम बनाने से पहले सदन के संज्ञान में मामला लाना अति आवश्यक है। इस पर अधिकारियों ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि शहर में किराया निर्धारण से पहले प्रत्येक वार्ड के दस से 15 घरों का सर्वे कराया गया। कच्चे मकानों पर 25 प्रतिशत व पक्के भवनों पर 75 प्रतिशत किराया निर्धारित किया गया है।
करीब सात घंटे तक चली बैठक में आमदनी का भी ब्योरा रखा गया। बताया गया कि सात अरब 17 करोड़ 69 लाख 18 हजार रुपए आमदनी हुई। आमदनी बढ़ाने को विज्ञापन संसाधनों को बढ़ाने पर सहमति बनी। बैठक के दौरान मुख्य लेखा परीक्षक अजय कुमार गैरहाजिर रहे। इसे लेकर पार्षदों ने कड़ी आपत्ति जताई। महापौर ने नगर आयुक्त रविरंजन को निर्देशित किया कि उन्हें तत्काल निलंबित कर दिया जाए। इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी जाए। वहीं निगम की दो ट्रक ईंट बेचने के मामले को सदन ने गंभीरता से लिया। मामले में संलिप्तता सामने आने पर जेई लालप्रताप को भी महापौर ने निलंबित करने का आदेश दिया।


