टैलेंट हो तो मुंबई में काम की कोई कमी नही- अंजना डॉबसन

( अनुराग शुक्ला )प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )।कलाकार अगर टैलेंटेड है तो एक न एक दिन कामयाबी उसके कदमो को चूमती जरूर है चाहे वो बदसूरत हो या फ़िर खूबसूरत।मुंबई में अगर अपनी पहचान बनानी है तो यहां आपके टेलेंट की ही कद्र होती है ये कहना है एक सफल कलाकार के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर चुकी यूपी की कलाकार अंजना डॉबसन का। 26 वर्षीय खूबसूरत कलाकार अंजना डॉबसन की गिनती एक सफल और अच्छे कलाकारों में की जाती है जो किसी परिचय की मोहताज़ नही हैं।
इस लगनशील,खूबसूरत अदाकारा से जब सफ़र के दौरान मुलाक़ात हुई और बातों ही बातों में पता चला कि ये एक कलाकार है तो फिर हम एक अच्छे दोस्त बन गए, सफ़र लम्बा था सो बातों का सिलसिला चल निकला ।मैने उत्सुकतावश पूछ ही लिया की अंजना जी आपके बारे में मै कुछ जानना चाहता हूँ?मुस्कुराते हुवे अंजना डॉबसन ने कहा बताइए सुधीर जी क्या जानना चाहते है आप।मैने कहा कुछ नही बस आपके परिवार के साथ ही फिल्मी सफ़र के बारे में जानने की उत्सुकता है।मुस्कुराते हुवे अंजना के बताया कि मेरे पापा जी एक सच्चे देश भक्त , भारत माता के सच्चे सपूत हैं मतलब की वो मिलेट्री में अच्छे पड़ पर हैं,हम तीन भाई बहनों के परिवार में मैं दूसरे नम्बर पर हूँ।
मैने बिना देरी किये सवाल दाग दिया कि अपनी शिक्षा दीक्षा के बारे में कुछ जानकारी दीजिये ?वो बोल पड़ी की मेरी शिक्षा ज्यादातर रानीखेत से हुई और बायो से एमएससी मैने कुमायूं विश्वविधयालय से किया है। फिल्मी दुनिया की तरफ़ आपका रुझान कैसे हुवा मेरे पर्सन को सुनते ही सहज भाव से अंजना बोल पड़ी सिन्हा जी बचपन से ही मेरा सपना था लेकिन सख्त हिदायत भी अपने दायरे को न लांघने की।उसका पालन मैने आज तक किया है।मेरे पास जो भी काम आता है उसे स्क्रिप्ट के एकोर्डिंग पूरी तरह से समझ कर ही मैं काम करने की सहमती प्रदान करती हूं,सुधीर जी मिलेट्री वाले कि बेटी हूँ ,ये बात सुनकर हंसी छूट जाती है।मुंबई में लेंग्वेज प्रॉब्लम का भी सामना करना पड़ा य यूं ही काम मिलता गया।सहजभाव से मुस्कान बिखेरने वाली अंजना ने कहा नही मुझे ऐसी किसी भी समस्या का सामना नही करना पड़ा क्योकि मुझे हिंदी,अंग्रेजी के अलावा उर्दू जुबान पर काफ़ी कमांड है और साफ सी बात है कि अगर आपके पास टैलेंट है तो काम खुद चलकर आता है बस इसके लिए थोड़ा प्रयास करना पड़ता है।आप अपने पहले काम और फिर अपने मुंबई के सफ़र के बारे में बताएं? सुधीर जी मुंबई में जब मै आई तो अपने टैलेंट के बल पर मुझे पहली बार डीडी मैट्रो के लिए काम मिला फ़िल्म थी “क्रिसमस गिफ्ट “इस एक घण्टे की फ़िल्म को लखनपाल जी ने डायरेक्ट किया था।इसके बाद फीचर फिल्म”अनकही ” में लीड रोल किया।जिसे डी मेनन साहब ने डायरेक्ट किया ।इसके अलावा दो और फ़िल्मो में मैंने मुख्य कलाकार के रूप में काम किया जो अभी कोरोना के कारण रिलीज़ नही हो पाई है।यही नही दर्जनों रीजनल फिल्मो के साथ कई शार्ट फ़िल्मो को किया है अभी कई अन्य फ़िल्मो के काम कोरोना काल की वजह से रुके है जो शीघ्र ही शुरू होने की उम्मीद है।मैने एक सवाल और पूछ लिया कि आप इतनी खूबसूरत है टैलेंटेड कलाकार है तो क्या किसी एड फ़िल्म यानी विज्ञापन में भी किस्मत आजमाई है? ये सुनते ही फ़ौरन बोल पड़ी अंजना डॉबसन किया है सुधीर जी किया है मैने कई एडफिल्मो को किया है मसलन’ मूव ‘वाला एडशूट शूट हुवा,वासिंग पाउडर,पान मसाला वगेरह वगैरह इसके एक्वा सतीश कौशिक जी के साथ कई अच्छी अच्छी कम्पनियों के लिए एड शूट किए है मैने।इसके अलावा क्या एलबम में भी किस्मत को आजमाया है आपने?मृदुभाषी अंजना बोल पड़ी की मै सोच ही रही थी कि ये प्रश्न भी आएगा जरूर तो मै आपकी जानकारी के लाइट बता दूँ की मैने हिंदी,पंजाबी व अन्य रीजनल भाषाओं में कई एलबमो में काम किया है। इसके अलावा सहारा टीवी के लिए टीवी सीरियल ” नमो नारायण ” में भी काम किया है।रास्ता लम्बा था आपसी बात चीत में सफर आसानी से कट रहा था बात चीत को आगे बढ़ते हुवे मेने पुनः प्रश्न किया कि आपने शरू में बताया था कि आपको बचपन से ही एक्टिंग का लगाव था तो क्या कॉलेज लाइफ के दौरान भी आपने एक्टिंग किया था?अंजना डॉबसन बोल पड़ी जी हां सुधीर जी मैंने कॉलेज में पढ़ाई के दौरान अपने शौक को जिंदा रखा और कई बार बेस्ट एक्टिंग का खिताब हासिल किया है मैने।सुना है कि आपका अपना खुद का प्रोडक्शन हाउस भी है।जी हां,बिल्कुल सत्य है।जहाँ दो से तीन रीजनल फ़िल्मो का निर्माण हो चुका है।यही नही इसके साथ ही वर्जिनिया फ़िल्म फेस्टिवल एवार्ड के लिए मेरी शार्ट फ़िल्म”” दहलीज “”को भेज गया है।इसके अलावा अंग्रेजी फ़िल्म CALL ME ORPHAN में भी मै काम कर रही हूं।इसके साथ साथ कई अन्य अंग्रेजी व हिंदी फिल्मों को साइन किया है,खुश होते हुवे अरे आप तो इलाहाबाद यानी प्रयागराज के है तो मै आपको बताना चाह रही हूं कि मेरी एक नही बल्कि दो फिल्मों की शूटिंग भी वही पर होनी है।बातों ही बातों में हम लोगो का सफर कब तय हो गया मालूम ही नही पड़ा।मैने अंजना डॉबसन का बातचीत के लिए धन्यवाद किया।एक दूसरे का अभिवादन करते हुवे पुनः मिलने के साथ अपने अपने गंतव्य स्थल की ओर रवाना हो गए।




