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प्रयागवाल सभा पर अधिकार जमाने के लिए के लिए तीर्थ पुरोहितों में आपसी तकरार

(आनंत पांडेय) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। प्रयागवाल सभा पर अधिकार जमाने के लिए के लिए तीर्थ पुरोहितों में आपसी तकरार बढ़ रही है। इसका मुख्य मुद्दा बताया गया सभा का चुनाव न होने को प्रमुख मुद्दा बनाया जा रहा है।
प्रयागवाल का चुनाव न होना चिंताजनक है
अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा की ओर से प्रयागवाल सभा के मौजूदा पदाधिकारियों पर चुनाव कराने का दबाव बनाया जा रहा है। अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष रामकृष्ण तिवारी का कहना है कि प्रयागवाल सभा के कई घटकों में बटना चिंताजनक है। समाज के एकता के लिए प्रयागवाल सभा के चुनाव की कार्रवाई जल्द शुरू करने की जरूरत है। इलाहाबाद हाई कोर्ट व रजिस्टार के निर्देशानुसार संबंधित प्रयागवाल सभा के मौजूदा पदाधिकारी अपने आय-व्यय का ब्योरा रजिस्ट्रार के समक्ष प्रस्तुत करें। जिससे चुनाव की कार्रवाई शुरू हो सके।प्रयागवाल सभा को लेकर तीर्थ पुराहितों में आपसी खींचातानी का माहौल है। राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य श्रवण कुमार शर्मा ने कहा कि तीर्थ पुरोहितों के अधिकारों की रक्षा के लिए अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा सदैव आवाज उठाती रहेगी और संघर्ष करती रहेगी। हालांकि प्रयागवाल का चुनाव न होना चिंताजनक है। चुनाव की प्रक्रिया जल्द शुरू करने के लिए ईमानदारी से प्रयास किया जाए। वरिष्ठ उपाध्यक्ष रामकृष्ण तिवारी ने कहा कि प्रयागवाल सभा प्रतिष्ठित संस्था है, जिसके प्रति अन्य समाज वर्गों का भी आस्था का केंद्र रही है। महासभा के राष्ट्रीय महासचिव चंद्रनाथ चकहा ने कहा कि महासभा के पदाधिकारी अपने लिए नहीं लड़ते समाज के हित की रक्षा में अपनी भूमिका अदा करते हैं। जरूरत पडऩे पर तीर्थ पुरोहितों की आवाज लखनऊ से दिल्ली तक पहुंचाने में सफलता भी मिलती है। एकजुट न होने पर मेला प्रशासन द्वारा प्रति वर्ष हमारी क्षति होती है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए तत्काल प्रभाव से चुनाव होना चाहिए। मंत्री माधवानंद शर्मा ने कहा कि महासभा प्रयागवाल तीर्थपुरोहितों के मौलिक अधिकारों को ध्यान में रखकर कार्य करती है जो आगे भी करती रहेगी।

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