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मकर संक्रांति: कोरोना संक्रमण पर आस्था भारी

( अनुराग शुक्ला/आनंत पांडे ) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। माघ मेला के पहले स्नान पर्व यानी मकर संक्रांति पर कोरोना संक्रमण और ठंड व कोहरे पर आस्था भरी पड़ रही है। मकर संक्रांति के पावन पर्व पर संगम सहित गंगा तथा यमुना के सभी स्नान घाटों पर ब्रह्म मुहूर्त से ही श्रद्धालुओं के स्नान का क्रम शुरू हो गया।

 

मकर संक्रांति के उपलक्ष्य में संगम व गंगा के पवित्र जल में स्नान का सिलसिला भोर में आरंभ हो गया। सूर्य का मकर राशि में प्रवेश दिन में 2:03 बजे होगा, लेकिन मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिए दूर-दूर से आए श्रद्धालु स्नान कड़ाके की ठंड के बीच करीब चार बजे से स्नान -दान और गोदान में जुट गए। संगम के अलावा गंगा के अक्षयवट, काली घाट, दारागंज, फाफामऊ घाट पर भी स्नान चल रहा है। प्रशासन का दावा है कि पांच लाख श्रद्धालु पुण्‍य की डुबकी लगा चुके हैं। जैसे- जैसे दिन निकल रहा है श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला जारी है। माघ मेले का पहला मकर संक्रांति स्नान आधी-अधूरी तैयारी के बीच स्नान पर्व पर श्रद्धालुओं का उत्साह देखने लायक है। मेला क्षेत्र में साधु संतों के पंडाल में भजन पूजन का दौर भी शुरू हो गया है। वैसे माघ मेला 27 जनवरी के आसपास रंग में आएगा। 28 जनवरी को पौष पूर्णिमा है और इस दिन से एक महीने का कल्पवास शुरू हो जाता है। अधिक मास ( पुरूषोत्तम मास) की वजह से तिथि बढ़ी है। सारे कल्पवासियों के आने के बाद ही मेले में रंगत नजर आएगी। स्नान के लिए संगम पर करीब एक किलोमीटर लंबा घाट तैयार किया गया है। स्नान घाटों पर पुलिस अलर्ट है।
माघ मेला में कोविड-19 गाइडलाइन के चलते इनकी संख्या पिछले स्नान पर्व से कम है पर, आस्था में कहीं कोई कमी नहीं दिखी। उधर, इसी तरह कानपुर, वाराणसी, फर्रुखाबाद और गड़मुक्तेश्वर में भी श्रद्धालु सुबह से ही पुण्य की डुबकी लगाने स्नान घाटों पर पहुंचने लगे। हर-हर गंगे, जय मां गंगे के जय घोष के साथ मकर संक्रांति पर्व का पुण्य प्राप्त करने को गंगा में डुबकी लगा रहे हैं। इस दौरान कई स्नान घाटों पर स्नान के मद्देनजर कोविड-19 प्रोटोकाल का पालन होता नजर नहीं आ रहा है। सूर्य के मकर राशि के प्रवेश को मकर संक्रांति कहते हैं। मकर संक्रांति प्रात? सूर्योदय के बाद पुण्यकाल में पवित्र स्थानों पर स्नान दान का महत्व होता है। इस पुण्यकाल में स्नान, सूर्य उपासना , जप , अनुष्ठान, दान-दक्षिणा करते है। काले तिल, गुड़ , खिचड़ी, कंबल व लकड़ी के दान का विशेष महत्व है। 14 जनवरी के बाद मलमास के कारण रूके हुए मांगलिक कार्य शुरू होते हैं। इस बार गुरु शुक्र अस्त के चलते विवाह आदि मांगलिक कार्य अप्रैल से होंगे। सूर्य सुबह 8:30 बजे उत्तरायण हुआ और मकर राशि में प्रवेश कर गया। सुबह 8:30 बजे से शाम 5:34 तक रहेगा। संक्रांति में दान और स्नान का महत्व है।

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